बलरामपुर। मनरेगा योजना से होने वाले विकास कार्यों में गड़बड़ी रोकने का काम अब सोशल आडिट टीम करेगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर सदस्यों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह टीम सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसे गांव की सोशल आडिट सभा में प्रस्तुत कर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जिले की 793 पंचायतों में मनरेगा से हर साल 200 करोड़ से अधिक का बजट खर्च होता है। इससे दो लाख श्रमिकों को रोजगार देने का लक्ष्य तय है। मनरेगा से विकास कार्यों के साथ ही पंचायतों की योजनाओं में मनरेगा का अंश भी शामिल किया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री आवास बनाने में लाभार्थियों को 90 दिन की मजदूरी दी जाती है। यही नहीं आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण, परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प, पंचायत भवनों के कायाकल्प आदि कार्य में भी मनरेगा के बजट को खर्च किया जा रहा है।
सोशल आडिट टीम इन योजनाओं में मनरेगा से खर्च किए बजट की उपयोगिता का सर्वे कर गड़बड़ी रोकने संबंधी अपनी सर्वे रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट को गांव के वरिष्ठ नागरिक की अध्यक्षता में सोशल आडिट सभा की बैठक में प्रस्तुत कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी होगी। टीम अध्यक्ष के अनुमोदन की रिपोर्ट सोशल आडिट पोर्टल पर भी अपलोड़ की जाएगी।
डीएम अरविंद सिंह ने बताया कि सोशल आडिट टीम के चयन की कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इसके लिए जिला विकास अधिकारी को सोशल आडिट का नोडल अधिकारी नामित किया गया है।