बलरामपुर। मछुआ समाज के लोगों को मछली का कारोबार करने के लिए मत्स्य विभाग ने शहर में मत्स्य हाट का निर्माण कराया था। जिसमें 10 दुकानें बनवाई गई थीं। निर्माण के आठ साल बाद भी हाट का संचालन शुरू नहीं हो सका है। मछुआ समाज के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मत्स्य विभाग ने वर्ष 2014-15 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 17.5 लाख रुपये की लागत से मत्स्य हाट का निर्माण कराया था। 10 दुकानें बनवाकर विभाग ने नगर पालिका प्रशासन को हैंडओवर कर दिया। दो साल पूर्व दुकानें 10 लाभार्थियों को आवंटित कर दी गईं लेकिन हाट का संचालन शुरू नहीं हो सका।
आरोप है कि जिन लोगों को मत्स्य हाट में दुकानें आवंटित की गईं वे मछली का कारोबार ही नहीं करते और जो इसका कारोबार करते हैं, उन्हें दुकान आवंटित नहीं किया गया।
सड़क किनारे लगती हैं दुकानें
मछली विक्रेता राधे, पीयूष, संतोष व करन आदि ने बताया कि हाट में दुकान न मिलने के कारण वे सड़क किनारे जमीन पर बैठकर मछली बेचते हैं। इसके एवज में उन्हें 30 से 40 रुपये प्रतिदिन किराया भी देना पड़ता है।
दोबारा शुरू कराया जाएगा संचालन
मत्स्य हाट की दुकानें लाभार्थियों को आवंटित कर दीं गई हैं। कुछ दिन यहां मछली मंडी का संचालन हुआ। उसके बाद विक्रेताओं ने बिक्री न होने की बात कहकर यहां बैठने से मना कर दिया। विक्रेताओं से बातचीत कर हाट का संचालन दोबारा शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. विनोद वर्मा, सहायक निदेशक मत्स्य विभाग बलरामपुर