गोंडा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीद-फरोख्त में किए गए खेल की परतें उधड़ने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, खरीद-फरोख्त से जुड़े लोग कमीशन की राशि को मल्टीविटामिन कोडवर्ड के नाम से मंगाते थे। ताकि कोई शक न कर सके।
सीडीओ की जांच रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के कई खेलों का खुलासा हुआ था। अप्रैल से अगस्त के बीच हुई अधिकांश खरीद फरोख्त का ठेका एक ही व्यक्ति से संबंधित फर्मों को दिया गया। इस दौरान सिर्फ दो ही फर्माें को तीन करोड़ 9 लाख पांच हजार 206 रुपये का काम दे दिया गया, जबकि जेम पोर्टल पर 20 से अधिक फर्मों की निविदा पड़ी थी। अन्य फर्माें के नमूने को बिना विशेषज्ञ की राय लिए ही अस्वीकार कर दिया गया था।
सूत्रों के अुनसार, खरीद फरोख्त से जुड़े लोग कमीशन की राशि को मल्टीविटामिन कोडवर्ड के नाम से मंगाते थे। सीएमओ कार्यालय के एक लिपिक के अनुसार, सभी खरीद फरोख्त में 10 से 12 प्रतिशत कमीशन की रकम पहले ले ली जाती थी। पूरा हिसाब होने के बाद भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर होते थे।
सीएमओ कार्यालय में अक्सर घोटाले व अनियमितता के मामले सामने आते हैं। जांच होने पर एनएचएम के पटल सहायक का पटल बदलकर मूल जिम्मेदारों को बचा लिया जाता है। पहले एनएचएम पटल देख रहे शशिकांत सिंह नियुक्तिपत्र वितरण में पैसे लेने के दोषी पाए गए तो उन्हें पड़रीकृपाल सीएचसी पर भेज दिया गया। दूसरी बार सरयू प्रसाद बैनर का साइज छोटा होने के मामले में हटाए गए, लेकिन किसी भी खरीद फरोख्त में अनुमोदन करने वालों में सीएमओ, चीफ फार्मासिस्ट सीएमएसडी स्टोर, एसीएमओ स्टोर, लेखा प्रबंधक होते हैं।