बलरामपुर। छह माह से पांच साल तक के अति कुपोषित (सैम) बच्चों का इलाज करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर में विशेष यूनिट शुरू की जाएगी। इसका संचालन शुरू होने से तुलसीपुर, गैसड़ी व पचपेड़वा के अति कुपोषित (लाल श्रेणी वाले) बच्चों को उपचार की सुविधा मिलेगी।
तराई क्षेत्र वाले इस जिले में कुपोषण का प्रभाव अधिक है। संतुलित खानपान न मिलने से यहां के अधिकांश बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते है। समय पर इलाज न मिलने से इन बच्चों में मानसिक व शारीरिक दिव्यांगता भी आ जाती है।
बच्चों को इससे बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने नई पहल शुरू की है। जिसमें सीएचसी तुलसीपुर में चार बेड की सैम यूनिट शुरू की जाएगी। जहां बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जाएगा। मुख्यालय स्थित एनआरसी में बेड खाली न होने पर वहां के बच्चों को भी तुलसीपुर में ही भर्ती किया जाएगा।
एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र मणि त्रिपाठी बताते हैं कि अति कुपोषित बच्चों को सैम (लाल) श्रेणी में रखा जाता है। स्वास्थ्य कर्मचारी बच्चाें में कुपोषण की पहचान उनकी बांह के मध्य परिधि में विशेष पट्टी बांधकर करते हैं। जांच में 11.5 या उससे कम अंक मिलने पर बच्चे को सैम माना जाता है। प्रत्येक बुधवार को ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस में भी एएनएम कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजती हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के प्रभारी डॉ. अजय कुमार पांडेय ने बताया कि एक माह से पांच साल तक के सैम विद कांप्लीकेशन वाले बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर इलाज किया जाता है। वर्ष 2022 में यहां 253 बच्चे भर्ती हुए थे। इसमें 239 ठीक होकर घर जा चुके हैं, जबकि गंभीर बीमारी वाले 14 बच्चों को हायर सेंटर रेफर किया गया है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि सीएचसी तुलसीपुर में चार बेड की सैम यूनिट बनाने की तैयारी चल रही है। जल्द ही अति कुपोषण श्रेणी में आने वाले बच्चों को यहां उपचार की सुविधा मिलने लगेगी।