बलरामपुर। अधिवक्ता राजेश पांडेय के हत्या की घटना को याद कर उनके परिवार वाले भावुक हो गए। परिजनों ने न्यायालय पर भरोसा जताते हुए इसे कानून की जीत बताया।
कोतवाली देहात के धुसाह गांव में जमीनी विवाद को लेकर वर्ष 2012 में हुए अधिवक्ता राजेश पांडेय की हत्या के मामले में दोषियों को सजा होने पर परिवारजन उनकी पत्नी सुलोचना पांडेय ने कहा कि घटना के समय मेरे चारों बच्चे बहुत छोटे थे। दोषियों ने मेरे पति की निर्मम हत्या कर दी थी। बच्चों व परिवार को संभालने में ससुरालवालों व मायकेवालों ने काफी मदद की।
भावुक होकर उन्होंने कहा कि घटना को देखते हुए दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन न्यायालय ने जो भी आदेश दिया है उसका पूरी तरह से सम्मान है। बड़ी बेटी आवंतिका ने बीए पास कर लिया है। उसने घटना को याद करते हुए कहा कि घटना के समय मैं काफी छोटी थी। मेरी एक बहन व दो भाई मुझसे भी छोटे थे। घटना ने परिवार को हिलाकर रख दिया था। पिता की कमी अभी भी हम लोगों को महसूस हो रही है।
अधिवक्ता प्रशांत कुमार ओझा, कमलेश्वर सिंह व पारितोष सिन्हा आदि का कहना है कि घटना के समय हम सभी मौजूद थे। लेकिन आगे चल रहे राजेश पांडेय पर दोषियों ने तलवार, सरिया व ईंटों से अचानक हमला कर दिया। जब तक हम लोग पहुंचे तक उन लोगों ने राजेश को मरणासन्न कर दिया था।