बलरामपुर। पूरे देश में पीएफआई के खिलाफ एनआईए व अन्य एजेंसियों के चल रहे छापों के बीच नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले को लेकर भी प्रदेश सरकार चौकन्नी नजर आ रही है। सोमवार रात एसटीएफ तथा खुफिया एजेंसियों की टीम ने पुलिस के साथ जिले में कई घंटे तक छानबीन की। संयुक्त टीम ने करीब 50 ऐसे लोगों का ब्योरा जुटाया है जो कि पिछले 10 साल में करोड़पति हुए हैं। हालांकि जिले से किसी को उठाया नहीं गया है।
सामाजिक व शैक्षिक कार्यों के नाम पर आतंकी फंडिंग को लेकर एनआईए समेत अन्य खुफिया एजेंसियों इन दिनों देशभर में छापे मार रही हैं। एनआईए के छापों में कई जगह खुलासा हुआ कि पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) तथा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के लिए फंडिंग करके प्रदेश में आतंकी व सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं अंजाम देने की तैयारी की जा रही है। खुफिया एजेंसियों की नजर नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले पर भी है।
इसी कड़ी में सोमवार रात एसटीएफ व खुफिया एजेंसी की टीम ने पुलिस के साथ सादुल्लाहनगर, रेहरा बाजार, गैड़ास बुजुर्ग, उतरौला, श्रीदत्तगंज, बलरामपुर, तुलसीपुर, महराजगंज, हरैया, गैसड़ी तथा पचपेड़वा के करीब 50 लोगों को संदिग्ध मानकर चिह्नित किया है। खुफिया टीम इन सभी का ब्योरा जुटा रही है।
शासन के निर्देश पर एसपी ने नव धनाड्यों की सूची पहले ही तैयार करा ली थी। इनमें कई ऐसे लोग भी हैं जो दस साल पहले साइकिल पर चलते थे मगर अब बड़ी लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं और जिन्होंने कम समय में ही आलीशान मकान व संपत्तियां बना ली हैं। इन लोगों के पास अचानक इतना पैसा कहां से आया? इसकी जांच की जाएगी। मंगलवार को खुफिया व पुलिस टीम की दबिश को लेकर पूरे दिन चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। हालांकि इस बारे में एसपी राजेश कुमार सक्सेना ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। गोपनीय मामलों की जानकारी साझा नहीं की जा सकती।