बलरामपुर। शहर में स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) मान्यता पाने के लिए 18 साल से लिखापढ़ी कर रहा है, लेकिन अभी तक मान्यता न मिलने के कारण डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) का प्रशिक्षण शुरू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जिले के छात्रों को डीएलएड प्रशिक्षण के लिए 70 किलोमीटर दूर गोंडा के दर्जीकुआं डायट जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
जिले में वर्ष 2005 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) का भवन बनकर तैयार हो गया था। तब यहां के युवाओं को आस जगी थी कि परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक बनने के लिए अब जिले में ही प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिलेगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका।
प्रवक्ता गोविंद कुमार का मानें तो डायट में सभी मानक भी पूरे हैं, फिर भी मान्यता नहीं दी जा रही है। मान्यता न मिलने से डायट परिसर में बना भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है। इसको लेकर विधायक पल्टूराम ने शासन को पत्र लिखा था। इस पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की निदेशक अंजना गोयल ने शासन को पत्र लिखकर मान्यता न मिलने की जानकारी दी है।
डायट के प्रभारी प्राचार्य डीआईओएस गोविंद राम ने बताया कि मान्यता के संबंध में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है। आपत्तियों का निवारण भी संस्थान की ओर से किया जा चुुका है। इसके बावजूद मान्यता नहीं मिली है।
युवाओं ने उठाए सवाल
एक निजी कॉलेज से डीएलएड का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके राहुल मोदनवाल, रविचंद्र सोनी, मंतशा रिजवी, संतोष कुमार, अनीश कुमार व विवेक यादव ने बताया कि डायट को राजनीतिक पेंच के कारण मान्यता नहीं मिल रही है। कई माननीयों ने निजी महाविद्यालयों में डीएलएड प्रशिक्षण के लिए मान्यता प्राप्त कर ली, लेकिन इसको लेकर खामोशी है।