बलरामपुर। तेजी से फैल रही संक्रामक बीमारियों के बीच संयुक्त जिला चिकित्सालय की आयुष विंग में आवश्यक दवाओं का स्टॉक ही नहीं है। अस्पताल आने वाले मरीजों का उपचार सिर्फ चार दवाओं के सहारे ही किया जा रहा है। उल्टी-दस्त व पेट दर्द आदि की दवा न होने पर आयुष चिकित्सक मरीजों को घरेलू नुस्खे बताकर बीमारी से बचने की सलाह दे रहे हैं। दवा आपूर्ति के लिए डीएम व सीएमओ को पत्र भेजा जा चुका है, मगर अब तक अस्पताल को दवाएं नहीं मिल सकी हैं।
बदलते मौसम में सर्दी-खांसी, बुखार, उल्टी व पेट दर्द की बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। अस्पताल में ऐसे मरीजों की भीड़ लगी रहती है। शनिवार को संयुक्त जिला चिकित्सालय की आयुष विंग में डॉ. श्याम प्रकाश ओपीडी करते दिखे। कक्ष के बाहर बैठे मरीज इलाज के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। दवा काउंटर पर छह डिब्बे में चार तरह की दवाएं रखी थीं।
इलाज कराने आईं रुकसार ने बताया कि चार दिन से खांसी, बुखार व पेट दर्द से पीड़ित हैं। अस्पताल से दो दवाएं मिली हैं। तीन दवा बाहर की लिखी गईं हैं। विनोद, सतीश कुमार व कीर्ति ने बताया कि अस्पताल में दवा न होने की बात कहकर डॉक्टर ने बाहर की दवाएं लिख दी हैं। ये दवाएं खरीदने में 350 रुपये खर्च हो गए।
डॉ. श्याम प्रकाश ने बताया कि आयुष विंग में दवाओं की कमी है। मौजूदा समय में यहां सिर्फ चार दवाएं डापोबिन, सिन्को, पिम्पल व पाइलो कैप्सूल ही उपलब्ध है। पेट दर्द व उल्टी-दस्त समेत कई बीमारियों की दवा खत्म हो चुकी है। इसके चलते गंभीर मरीजों को मजबूरी में बाहर की दवा लिखनी पड़ती है। सीएमओ व जिलाधिकारी को पत्र लिखकर दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि जेम पोर्टल पर होने वाली निविदा प्रक्रिया में तकनीकी समस्या के कारण आयुष विंग को दवा वितरित करने में दिक्कत आ रही है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कराकर अस्पतालों को दवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी।