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हम लिहा घूमित है खाना, एमपीपी या एमएलके जाओ...

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बलरामपुर। हम लिहा घूमित है खाना, एमपीपी या एमएलके जाओ वहीं खाना खाओ। मंगलवार को चुंगी नाका पर बाढ़ पीड़ितों को अधिकारी कुछ इसी तरह दुत्कारते दिखे। दरअसल भूख-प्यास से तड़प रहे बाढ़ पीड़ित रेलवे लाइन पर करीब आठ से दस किलोमीटर चलकर मंगलवार को चुंगी नाका पहुंचे तो वहां अधिकारियों को देखकर उनकी आस जग गई कि शायद अब भोजन मिल जाए। मगर बाढ़ पीड़ितों ने जब भूखे होने की बात कही तो एक अधिकारी ने उन्हें फटकारते हुए एमपीपी या एमएलके कॉलेज जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। थके हारे बाढ़ पीड़ित वहीं बैठ गए और अपने नसीब को कोसने लगे।
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जिले में बाढ़ से करीब पांच लाख आबादी प्रभावित है। ग्रामीण क्षेत्र तो दूर शहर के हजारों लोगों के समक्ष अब रोटी का संकट उत्पन्न होने लगा है। लोग भूख-प्यास से परेशान हैं। प्रशासन की तरफ से पहुंचाई जा रही मदद ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। मंगलवार को दुर्गापुर, लालनगर, गंगाडिहवा, बिजलीपुर आदि गांवों के दर्जनों लोग बाढ़ से निकलकर किसी तरह रेलवे लाइन से होते हुए चुंगी नाका पहुंचे। इनमें से बाढ़ पीड़ित संतोष मिश्र, सचिन, राम दुलारी, मीना, इंद्र कुंवरि, रागिनी, खुशी, ममता, सुशीला, कविता आदि ने अधिकारियों को देखते ही कहा कि साहब हम लोग कई दिन से भूखे हैं। कुछ खाने-पीने की व्यवस्था करा दो।
इतना सुनते ही मौके पर मौजूद एक प्रशासनिक अधिकारी बोले- हम लिहा घूमित है खाना, एमपीपी या एमएलके जाओ वहीं खाना खाओ। अधिकारी के व्यवहार से मायूस बाढ़ पीड़ित वहीं बैठ गए। चुंगी नाका से एमपीपी इंटर कॉलेज की दूरी लगभग दो से तीन किलोमीटर है और बाढ़ पीड़ितों में इतनी शक्ति नहीं बची थी कि वह और पैदल चल सकें। भूख-प्यास से तड़प रहे लोग जुगाड़ की नाव बनाकर बाढ़ से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह खमौहा गांव के पास तीन बच्चे ट्यूब पर बैठकर बाढ़ के पानी से निकलते दिखे। तमाम बाढ़ पीड़ित सड़क किनारे बरसाती तानकर उसके नीचे ठिकाना बनाए हैं। इन्हें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
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