बलरामपुर। वाहनों का फिटनेस प्रमाण-पत्र पाने के लिए अब वाहन चालकों को एआरटीओ विभाग की दौड़ लगाने की परेशानी नहीं उठाना पड़ेगी। शहर में जल्द ही पीपीपी मॉडल की तर्ज पर संसाधनयुक्त फिटनेस सेंटरों का संचालन शुरू होगा। वाहन स्वामी सुविधानुसार सेंटर पर पहुंचकर वाहन की जांच कराकर फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे।
जिले में कोई फिटनेस सेंटर न होने के कारण स्कूली वाहनों के साथ ही अन्य व्यवसायिक वाहन भी बिना फिटनेस के फर्राटा भर रहे हैं। हालांकि वाहनों की जांच और उनके फिटनेस के लिए एआरटीओ विभाग की ओर से एक अधिकारी की तैनाती की गई है। उनके द्वारा प्रदूषण के जांच प्रमाण-पत्र, कर चुकता रिपोर्ट, बीमा आदि कागजातों की जांच के आधार पर फिटनेस प्रमाण-पत्र देने का कार्य होता है। ऐसे में फिटनेस परखने को वाहन की कोई तकनीकी जांच नही है पाती है।
वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने निर्देश पर अब जिले में पीपीपी मॉडल के आधार पर फिटनेस केंद्र स्थापित करने की तैयारी शुरू की गई है। इससे आधुनिक मशीनों से होने वाली जांच के बाद ही वाहनों को फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी हो सकेगा। सेंटर स्थापित कराने के लिए विभाग की ओर से कागजी कार्रवाई पूर्ण करने के साथ इसके संचालन के लिए आवेदन मांगने की तैयारी अंतिम दौर में है। एआरटीओ बलरामपुर अरविंद यादव ने बताया कि फिटनेस सेंटर स्थापित करने के आवेदन के लिए आवेदक के पास चार एकड़ जमीन के साथ ही वाहनों की फिटनेस परखने को जरूरी तकनीकी संसाधन होना जरूरी होगा।
एआरटीओ ने बताया कि फिटनेस के लिए वाहन को सेंटर ले जाना जरूरी होगा। सेंटर में मौजूद ट्रैक पर कुल 68 प्वाइंट से गाड़ी को गुजरना होगा। जांच का यह सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन रहेगा। इस दौरान अगर एक भी प्वाइंट में वाहन जांच में खरा नहीं उतरा तो फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी नहीं होगा। सेंटर में प्रत्येक वाहन की प्रक्रिया को विभागीय अधिकारी कार्यालय में ही बैठकर कंप्यूटर अथवा मोबाइल पर देख सकेंगे।