बलरामपुर। सर्दी सितम ढा रही है। इसके बाद भी बचाव के इंतजाम महज कागजी हैैं। रैन बसेरा तो बना दिया गया मगर सुविधाएं नहीं हैं। अलाव तक का प्रबंध नाकाफी है। ऐसे में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस व अधिकतम 19 रिकॉर्ड किया गया।
सोमवार रात 10:21 बजे महिला अस्पताल में बने रैन बसेरे में पलंग तो लगा था मगर उस पर न तो बिस्तर था और न ही अन्य इंतजाम। ऐसे में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को समस्या हो रही है। यहां बिजली भी नहीं थी। तीमारदार रेनू, सुनीता व बबलू ने बताया कि केवल पलंग मिला है, बिस्तर घर से लेकर आए हैं। रोडवेज में बने रैन बसेरे में सन्नाटा था। यहां पलंब व बिस्तर तो था मगर कोई यात्री नहीं था।
रात 11 बजे वीर विनय चौराहे पर हनुमानगढ़ी चौराहा हो या फिर मेमोरियल अस्पताल का मोड़, कहीं भी अलाव जलता नहीं दिखा। ये बात अलग है कि 25 वार्डों में से नगर पालिका महज 12 स्थलों पर अलाव जलवाने का दावा कर रही है।
आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह का कहना है कि कोहरे में गाड़ी धीरे चलाएं। बेवजह ओवरटेक न करें। कोहरे में गाड़ी चलाते समय दिन में भी पार्किंग लाइट जलाकर चलें ताकि दूसरे वाहन चालकों को आपका वाहन दिख सके। वाहन चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करें। अति आवश्यक कार्य के लिए ही सफर पर निकलें। रात्रि व सुबह जल्दी सफर पर न निकलें। आगे चल रही गाड़ी से दूरी बनाकर चलें, हाईवे पर सड़क किनारे पटरी का ध्यान रखकर चलें।
आपदा विशेषज्ञ ने कहा कि लिंक रोड्स से आने वाली गाड़ियों पर ध्यान देकर बचाव करें। हाईवे पर गाड़ी कभी न रोकें। मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें। बाहर की आवाज सुनने के लिए शीशा थोड़ा नीचे रखें। लो बीम पर लाइट रखें।
गोंडा से बलरामपुर का सफर पहले एक घंटे में पूरा हो जाता था, मगर कोहरे के कारण ये सफर अब पौने दो घंटे में पूरा हो पा रहा है। पहलवारा के सौरभ सोमवार रात आठ बजे की बस से यहां से निकले। वह 09:46 बजे गोंडा पहुंचे। ट्रेनों की रफ्तार पर भी कोहरे का असर पड़ा है। मंगलवार को डेमू 35 मिनट व गोरखपुर-ऐशबाग इंटरसिटी ट्रेन भी 23 मिनट की देेरी से पहुंची।