बलरामपुर के भेलया मदनपुर गांव के पास दुकान पर मौजूद लोग।-संवाद
सीमा से सटे क्षेत्र में नूर आलम लगाता रहा सुरक्षा में सेंध, किसी को पता ही नहीं चला
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोप में हुई है गिरफ्तारी
इससे पहले नेपाल के सीमावर्ती गोंडा में भी हो चुकी है संदिग्धों की गिरफ्तारी
रायबरेली से भी जुड़ चुके हैं देश विरोधी गतिविधियों के तार
बलरामपुर। देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में नूर आलम की गिरफ्तारी ने एक बार फिर नेपाल सीमा को संवेदनशील बना दिया। नेपाल से सटे क्षेत्र में बैठ नूर आलम संवेदनशील सूचनाएं विदेशियों को भेजता रहा। इसके एवज में उसने करीब दस लाख रुपये भी कमा लिए। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी खबर नहीं लग सकी।
सीमावर्ती क्षेत्रों में एटीएस की कार्रवाई का यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले वर्ष 2023 में गोंडा में आईएसआई से संपर्क में चार लोगों को एटीएस ने पकड़ा था। इसमें भी स्थानीय स्तर पर मौन ही रहा। हाल के दिनों में रायबरेली में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले के बाद अब बांग्लादेशियों की भूमिका की जांच हो रही है। ऐसे में इनकी सक्रियता ने स्थानीय खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
बलरामपुर जिला वर्ष 2020 में भी सुर्खियों में आ चुका है। जुलाई महीने में दिल्ली के धौलाकुआं में मुठभेड़ के बाद उतरौला के बढ़या भैसाही गांव निवासी आतंकी अबू युसुफ उर्फ मुस्तकीम की गिरफ्तारी हुई। वह यहां मनिहार का काम करता था, लेकिन घर को ही बम की प्रयोगशाला बना रखा। स्थानीय नेटवर्किंग के जरिए वह अपने पैर मजबूत करता रहा, लेकिन किसी को भनक न लगी। हैरानी की बात यह थी कि लॉकडाउन के समय उसने गांव के कब्रिस्तान में विस्फोटक का परीक्षण भी किया था। बाद में दिल्ली को दहलाने की कोशिश में उसे पकड़ा गया।