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Gonda News: वसीयत में फर्जीवाड़े के आरोपी सौरभ की तलाश

Mon, 06 Feb 2023 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। वसीयत में फर्जीवाड़े के आरोपी तत्कालीन प्रभारी सब रजिस्ट्रार सौरभ सिंह की पुलिस ने तलाश तेज कर दी है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच शाखा (एसआईटी) सौरभ के खिलाफ दर्ज मुकदमे की तफ्तीश में चार्जशीट के करीब पहुंच चुकी है। सौरभ की गिरफ्तारी के लिए एसओजी को भी लगाया गया है।
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जिले के तीन रजिस्ट्री दफ्तरों गोंडा सदर, करनैलगंज व तरबगंज में 14 वसीयतें नियमों को दरकिनार कर तैयार की गईं थीं। बस्ती, आजमगढ़, बलिया और गोरखपुर तक के लोगों की फर्जी वसीयत यहां बनाई गई। आजमगढ़ के थाना सिधारी अंतर्गत ग्राम बैठोली निवासी रिंकी सिंह के पति की मृत्यु के बाद उसके पति के नाम से फर्जी वसीयत तैयार कर दी गई। बस्ती के पाऊतप्पा कनैला गांव के राम नारायण पांडेय की मृत्यु साल 1996 में हो गई थी। उनकी वसीयत साल 2018 में गोंडा सदर तहसील में की गई। गोरखपुर के सोहगौरा तहसील बांसगांव के विंध्याचल गुप्ता की मौत साल 2017 में हो गई थी। उनकी वसीयत भी गोंडा सदर रजिस्ट्री दफ्तर में साल 2019 में की गई।

अंबेडकरनगर के वीरेंद्र कुमार मिश्र की वसीयत का मामला भी चौंकाने वाला रहा। गन्ना विकास निरीक्षक के पद पर कार्यरत वीरेंद्र कुमार मिश्र का निधन साल 2010 में हुआ था। अंबेडकरनगर में उनकी पत्नी व दो बच्चों के नाम प्रशासन ने वरासत तक कर दी। जब 21 अप्रैल 2012 को परिजनों ने खतौनी निकालने का प्रयास किया तो पता चला कि वसीयत पहले ही हो चुकी है। वसीयत 16 अगस्त 2011 को गोंडा के करनैलगंज रजिस्ट्री दफ्तर में हुई। जालसाजों ने फर्जी वसीयत के लिए सरकारी अभिलेख तक बदल डाले।
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जांच में जिले में वसीयत के 14 मामलों में फर्जीवाड़ा पाया गया। इसी तरह कई जिलों के लोगों की वसीयत जिले के रजिस्ट्री दफ्तरों में हुई। वसीयत के फर्जीवाड़े के कुल 14 मामलों में से दस मामलों में तत्कालीन सब रजिस्ट्रार सौरभ सिंह की संलिप्तता पाई गई। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू की। इसी बीच डीआईजी में मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी। एसआईटी अब मुकदमे में चार्जशीट के करीब पहुंच गई है। पुलिस ने आरोपी तत्कालीन प्रभारी रजिस्ट्रार सौरभ की तलाश तेज कर दी है। सौरभ की गिरफ्तारी के लिए एसओजी को टास्क सौंपा गया है।

वसीयत के फर्जीवाड़े में पुलिस अब तक पांच लोगों के जेल भेज चुकी है। इसमें बृजेश अवस्थी, अनिल सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, राकेश कुमार त्रिपाठी व सालिक राम सिंह शामिल हैं। आरोपी सालिक राम सिंह की जेल में तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल भेजा गया था। जहां उसकी मौत हो गई थी।
डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जमीनों के साथ ही वसीयत के फर्जी मामलों की शिकायत पर जांच कराई गई तो 14 मामलों में फर्जीवाड़ा पाया गया। तत्कालीन प्रभारी सब रजिस्ट्रार सौरभ सिंह के गिरफ्तारी के लिए तलाश तेज कर दी गई है। एसओजी को गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जल्द ही आरोपी सौरभ पुलिस की गिरफ्त में होगा।
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