गोंडा। नगरीय सीमा से सटे 34 राजस्व गांवों की सुरक्षित भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन लगातार कार्रवाई में जुटा है। बीते जनवरी माह में सिविल लाइंस में तीन एकड़ भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराने के बाद प्रशासन ने 34 गांवों में निगरानी की जिम्मेदारी राजस्व लेखपालों को सौंपी थी।
इसके बाद भी सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतें कम नहीं हुईं। एसडीएम ने जांच की तो सामने आया कि राजस्वकर्मियों की ‘दुरभिसंधि’ से ही ये अवैध निर्माण हो रहे हैं। इस पर सात लेखपाल प्रशासन के निशाने पर आ गए हैं। इन्हें चेतावनी दी गई है।
प्रशासन ने गांवों की सरकारी जमीनों की निगरानी के साथ ही राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। बीते सोमवार को एसडीएम सदर विनोद कुमार सिंह ने तहसील के हर पटल की समीक्षा की थी। दस राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही उजागर होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद भी सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतें आईं। एसडीएम ने छानबीन की तो सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण में राजस्वकर्मियों की मिलीभगत उजागर हुई।
एसडीएम ने ऐसे सात लेखपालों को चिह्नित किया है। इसमें शहर से जुड़े बड़गांव के लेखपाल राम बहादुर पांडेय, सेमरदम्मन के राजेंद्र प्रसाद वर्मा, गिर्द गोंडा के लेखपाल संतोष कुमार पांडेय, परेड सरकार के अभय प्रताप श्रीवास्तव, झंझरी के आत्माराम वर्मा, छावनी सरकार के पवन कुमार सिंह व जानकीनगर के गिरीश यादव शामिल हैं।
ये गांव शहर से सटे हैं और यहां की जमीनें काफी कीमती हैं। एसडीएम ने इन लेखपालों से जवाब मांगा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीनों पर कब्जे व अवैध निर्माण में इन लेखपालों की दुरभिसंधि (मिलीभगत) प्रतीत हो रही है। ऐसे में इन लेखपालों पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
एसडीएम विनोद कुमार सिंह का कहना है कि सदर तहसील के कुछ गांव शहर से सटे हैं। इन गांवों में सरकारी जमीनों को सुरक्षित करने के लिए हर स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें लापरवाही करने वाले लेखपाल चिह्नित किए जा रहे हैं।