बलरामपुर। जिला सत्र न्यायाधीश ने हत्या के दोषी तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला जज ने दोषियों को 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप सिंह ने बताया कि 24 मार्च 2015 को थाना ललिया क्षेत्र के गांव अकबरपुर निवासी हनुमान प्रसाद ने मुकदमा लिखने के लिए प्रार्थना पत्र थाने में दिया था। वादी का आरोप था कि उसका भाई राम प्रसाद अपनी पत्नी को लाने ससुराल ग्राम लालपुर कंजेभरिया गया था। वहां पत्नी के नहीं मिलने पर रामप्रसाद ने ससुराल वालों से पूछताछ की। जहां सुकई, बृजेंद्र उर्फ झगरू, दौलतराम व चिल्लावन ने रामप्रसाद को लाठी-डंडों से जमकर पीटा। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मुकदमा लिखकर विवेचना शुरू की।
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय में परीक्षण के दौरान चिल्लावन की मृत्यु हो जाने के कारण उसका नाम पत्रावली से हटा दिया गया है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए साजिशन फंसाए जाने की दलील दी। सरकारी अधिवक्ता ने घटना में मृतक को आई आठ चोटों का हवाला देते हुए जानबूझकर हत्या किए जाने की दलील देते हुए अधिकतम सजा दिए जाने की अपील की।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद जिला जज लल्लू सिंह ने सुकई, बृजेंद्र व दौलतराम को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।