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Balrampur News: स्टाफ नर्स के मन की बात, रोते हुए आने वाले मरीज हंसते हुए घर जाएं

Thu, 11 May 2023 10:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर के सीएचसी गैड़ास बुजुर्ग में स्टाफ नर्स से जानकारी लेती गुणवत्ता सलाहकार अनामिका सिंह।
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बलरामपुर। अस्पताल आने वाले मरीजों से सीधा संपर्क स्टाफ नर्स का होता है। आमतौर पर कई बार स्टाफ नर्स को लेकर कई तरह की शिकायतें आती रहती हैं। इसके बाद भी वे मरीजों के उपचार में लगी रहती हैं। विभागीय अधिकारी स्टाफ नर्स के कौशल विकास को लेकर भी प्रशिक्षित करते हैं। कार्यशाला हो या अन्य कार्यक्रम, स्टाफ नर्स को आवश्यक जानकारी दी जाती है।
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संयुक्त जिला अस्पताल की स्टाफ नर्सों का कहना है कि अगर कोई अस्पताल रोते हुए आता है तो बस यही एक इच्छा रहती है कि वह यहां से डिस्चार्ज होकर अपने घर हंसते हुए जाए।
सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार कहते हैं कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, सुरक्षित प्रसव कराने, मातृ शिशु मृत्युदर मेें कमी को लेकर प्रयास किया जा रहा है। प्रजनन दर को कम करने के लिए स्टाफ नर्स महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। गुणवत्ता सलाहकार अनामिका सिंह ने शिवपुरा व गैड़ास बुजुर्ग में स्टाफ नर्स से बात कर उन्हें प्रशिक्षित किया।
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मरीज को मिले त्वरित उपचार
अस्पताल आने वाले मरीजों को त्वरित उपचार मिले। समय से उनकी दवाएं शुरू हों। मरीजों की स्थिति को लेकर चिकित्सकों को अवगत कराने के साथ उनकी जिंदगी बचाने का प्रयास करना हम अपना धर्म समझते हैं।
-दुर्गा पाल, मैट्रन

निभानी पड़ती है हर एक जिम्मेदारी
कई बार ऐसा होता है कि कई मरीज ऐसे आते हैं जिनके साथ कोई नहीं होता है। ऐसे में उनके इलाज से लेकर खानपान तक की जिम्मेदारी खुद संभालनी पड़ती है। इससे संतोष मिलता है कि हमारा जीवन किसी के काम आ रहा है।
-कल्पना त्रिपाठी, स्टाफ नर्स

मरीजों की सेवा में सब भूल जाते हैं
वार्ड में ड्यूटी के दौरान कई बार ऐसा होता है कि समय का ख्याल ही नहीं रहता। समय से दवा, जांच आदि के बारे में अपडेट होने के साथ ही चिकित्सक से संपर्क कर उन्हें स्थिति से अवगत कराना पड़ता है। मरीजों के दर्द को देख अपना दर्द भूल जाना पड़ता है।
-संगीता श्रीवास्तव, स्टाफ नर्स

खुद के पैसे से मंगवाया खाना
अभी कुछ दिन पहले की बात है। वार्ड में एक निराश्रित मरीज आया। उसके लिए खुद के पैसे से खाने के साथ ही कुछ आवश्यक दवाएं भी मंगवानी पड़ी। यहां तक कि खून के लिए भी अफसरों से बात कर दिलवाया तब जाकर उसकी जान बची।
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-मिथलेश तिवारी, स्टाफ नर्स
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