बलरामपुर। परिषदीय स्कूलों की जिओ टैगिंग में लगे एआरपी की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। सुबह फोन पर सूचना देने के बाद भी प्रधानाध्यापक जियो टैगिंग के लिए स्कूल का ताला खुलवाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। ऐसे में स्कूल पहुंचने पर एआरपी को घंटो इंतजार करने के बाद बिना काम पूरा किए ही वापस लौटना पड़ता है।
गर्मी की छुट्टियों में बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों की जियो टैगिंग करा रहा है। समेकित शिक्षा के बाद अब इस काम को पूरा करने की जिम्मेदारी एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) को दी गई है। एआरपी का कार्य स्कूल पहुंच वहां उपलब्ध रसोई, शौचालय, बिजली की व्यवस्था, फर्श पर टाइल्स, रंगाई-पुताई, वॉल पेंटिंग, बाउंड्री वॉल व गेट सहित 19 बिंदुओं की स्थिति का विवरण व फोटो पोर्टल पर अपलोड करना है।
सूचना के बाद भी नहीं खुला ताला
श्रीदत्तगंज के एआरपी अशोक मिश्रा को बृहस्पतिवार की सुबह 9.45 बजे पीएस देवरिया मुबारकपुर द्वितीय बंद मिला। एआरपी सुनील सैनी को भी सुबह 10.25 बजे यूपीएस बिथरिया परसपुर बंद दिखा। दोनों एआरपी ने बताया कि सुबह सात बजे प्रधानाध्यापक को फोन पर सूचना दे दी गई थी। इसके बाद भी स्कूल नहीं खुला। अब दोबारा आना पड़ेगा। बलरामपुर के एआरपी पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि प्रधानाध्यापक द्वारा सूचना देने के बाद भी पीएस अड़ार-पाकड़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्कूल नहीं पहुंची। ऐसे में विवरण अपलोड नहीं हो सका।
सहयोग न करने वालों पर होगी कार्रवाई
जियो टैगिंग महत्वपूर्ण कार्य है, सभी शिक्षकों को इसमें सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। जो शिक्षक इसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- कल्पना देवी, बीएसए