बलरामपुर। रमजान माह का इंतजार सभी मुसलमान बड़ी बेसब्री से करते हैं। मुसलमानों के लिए रमजान का महीना बहुत ही पाक माना गया है। मुस्लिम समाज के लोग रमजान माह में रोजा रखने के साथ ही पांचों वक्त की नमाज पढ़ते हैं। पूरे माह अल्लाह की इबादत करते हुए गरीब व असहायों की सहायता करते हैं। रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियों का पुण्य मिलता है।
ये बातें शुक्रवार को मुस्लिम धर्मगुरु एवं जामिया अरबिया अनवारुल कुरान अरबी डिग्री कॉलेज के शिक्षक मौलाना शब्बीर अहमद ने रमजान माह की अहमियत बताते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि यह बहुत काम लोगों को मालूम होगा कि रमजान में क्या करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। रोजे की पाबंदियों को न मानने पर आपकी इबादत बेकार हो सकती है। रमजान में सिर्फ रोजा रखना ही काफी नहीं है, बल्कि कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। रमजान का सबसे पहला फर्ज है कि प्रतिदिन रोजा रखें और कुछ भी खाने-पीने से परहेज करें।
कई लोगों का यह मानना है कि रोजा रखने के बाद नहाना नहीं चाहिए, लेकिन यह बात गलत है। आप रोजा रखने के बाद भी नहा सकते हैं, लेकिन नहाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पानी आपके मुंह के अंदर न जाए। रोजा रखने के साथ-साथ पांचों वक्त की नमाज पढ़ना व कुरान-ए-पाक की तिलावत करने वालों की हर नेक दुआ अल्लाह कुबूल करता है।