बलरामपुर। अवकाश के दिन भी मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू हुआ मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला चिकित्सकों के मनमानी की भेंट चढ़ता दिख रहा है। कहीं अस्पताल बंद रहता है, तो कहीं डॉक्टर ही गायब रहते हैं। सर्दी-बुखार के मरीजों की कोविड जांच भी नहीं की जाती है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का उपचार नहीं हो पाता है। मरीज घंटों डॉक्टर का इंतजार कर लौट जाते हैं, मगर जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। रविवार को स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित जन आरोग्य मेले की पड़ताल में कुछ इसी तरह का नजारा देखने का मिला। पेश है रिपोर्ट
अचलापुर वार्ड स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद मिला। कैमरा देखकर वार्ड ब्वाय रजत गेट पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि डॉ. समीर वर्मा उतरौला से आते हैं वह रास्ते में हैं, कुछ देर में आ जाएंगे। स्थानीय निवासी राजेश, छोटकन व प्रमित ने बताया कि अस्पताल में कोई दवा नहीं मिलती है, अक्सर यह केंद्र बंद ही रहता है।
गौरा क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरा में सन्नाटा दिखा। डॉ. यासिर खान की कुर्सी खाली मिली। फार्मासिस्ट सौरभ दूबे ने बताया कि अब तक 13 मरीजों को दवा दे चुके हैं मगर वहां कोई मरीज नहीं दिखा। स्थानीय निवासी सलीम, फतेह बहादुर सिंह व अनूप पांडेय ने बताया कि डॉक्टर, एएनएम व एलटी नहीं आते हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मथुरा बाजार में डॉ. रजत शुक्ल ओपीडी करते मिले। उन्होंने बताया कि 36 मरीजों की जांच कर उन्हें दवा दी गई है। इसमें अधिकांश मरीज सांस, बुखार व पेट दर्द के थे। फार्मासिस्ट इब्तेहसन जैदी व लैब अटेंडेंट नियाज अहमद उपस्थित मिले, लेकिन किसी मरीज की कोरोना जांच नहीं हुई थी।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अचलापुर व पीएचसी पिपरा के चिकित्सकों के समय से अस्पताल न आने की शिकायत पहले भी मिल चुकी है। अनुपस्थित मिले दोनों चिकित्सकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। आरोग्य मेले में कुल 672 मरीजों का उपचार किया गया है।