बलरामपुर। बच्चों की सेहत की जांच को लेकर स्वास्थ्य महकमा गंभीर नहीं दिख रहा है। बीते सात महीने में आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पढ़ने वाले दो लाख दस हजार बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो सका है। नवंबर महीने की शुरुआत से ही ब्लाॅकों में तैनात 18 टीमों के पास चलने के लिए वाहन नहीं हैं। वाहनों के अभाव में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण सात महीने से ठप है।
आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चल रहा है। हर ब्लाॅक में इसके लिए चिकित्सकों की दो-दो टीमें तैनात हैं। जो शिविर लगाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवा देती हैं। इन टीमों के आने-जाने के लिए लगी वाहनों का अनुबंध 31 अक्तूबर को ही समाप्त हो चुका है। इसके बाद से आरबीएसके कार्यक्रम जिले में ठप है। इस काम में लगे 36 डॉक्टर ओपीडी के नाम पर अस्पताल में दिन काट रहे हैं।
उतरौला ब्लॉक की एक टीम में तैनात अमरेंद्र कुमार, शिवपुरा के डॉ. मोहम्मद आरिफ व रेहराबाजार के डॉ. जाकिर आदि ने बताया कि गाड़ी के अभाव में टीमें बच्चों की जांच नहीं कर पा रही हैं। अधीक्षक के निर्देश पर ओपीडी व अन्य विभागीय कार्य किए जाते हैं।
हर ब्लॉक में दो-दो टीमें तैनात
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत प्रत्येक ब्लॉक में दो-दो टीमें तैनात हैं। प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट व एक एएनएम अथवा स्टाफ नर्स शामिल हैं। टीम निर्धारित प्लान के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में शिविर लगाकर बच्चों का इलाज करती हैं। गंभीर बीमारी वाले बच्चों को शनिवार के दिन इलाज के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। जिले में कुल 18 टीमें हैं। एक टीम को प्रतिदिन 120 बच्चों की जांच करने का लक्ष्य है।
एक नजर में आंकड़े
ब्लॉक - 9
आरबीएसके टीम - 18
स्कूल - 1815
पंजीकृत छात्र - 2,25,000
आंगनबाड़ी केंद्र - 1882
पंजीकृत बच्चे- 2,34,800
जेम पोर्टल पर समय से बिड न आने सहित अन्य तकनीकी कारणों से गाड़ियों का अनुबंंध कराने में देरी हुई है। वाहनों की निविदा प्रक्रिया करीब-करीब पूरी हो चुकी है। जुलाई महीने की शुरुआत में ही सभी टीमों को वाहन उपलब्ध करा दिया जाएगा।
-डाॅ. सुशील कुमार, सीएमओ