अंबेडकरनगर। बिना शैक्षिक अवकाश के परास्नातक की डिग्री हासिल करना एक रोजगार सेवक को महंगा पड़ा है। दो वर्ष की अवधि के वेतन रिकवरी की संस्तुति की गई है।
ग्राम पंचायत बजदहिया पाईपुर निवासी सूर्य भूषण त्रिपाठी ने ग्राम पंचायत में तैनात रोजगार सेवक नरेंद्र कुमार पर अधिकारियों की अनुमति के बिना दो वर्ष तक बाहर रहकर शिक्षा ग्रहण करने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज करवाई थी। इस पर डीएम ने जांच की जिम्मेदारी बीडीओ बसखारी को सौंपी तो जांच में पाया गया कि वर्ष 2009-10 तथा 2010-11 में रोजगार सेवक ने परास्नातक की डिग्री सुल्तानपुर जनपद में संस्थागत परीक्षार्थी के तौर पर हासिल की। बीडीओ दिनेश प्रताप सिंह ने नरेंद्र कुमार को दोषी करार देते हुए 24 माह का मानदेय 48 हजार मनरेगा के खाते में जमा कराने की रिपोर्ट उपायुक्त श्रम रोजगार व जिलाधिकारी को भेज दी।
रोजगार सेवक का मानदेय उस समय प्रतिमाह दो हजार रुपये ही था। उधर, रोजगार सेवक से जुड़ा दूसरा मामला फरीदपुर सैफन का है। गांव निवासी बंदना ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि यहां तैनात महिला रोजगार सेवक शादी के बाद से ही अपने ससुराल में रहती हैं। ग्राम पंचायत में बगैर उपस्थिति के उनका नियमित मानदेय भुगतान किया जा रहा है।