बलरामपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों व स्टाफ की लापरवाही रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरों को एक अगस्त से क्रियाशील कर दिया गया है। अब लखनऊ में बैठे निदेशालय के अधिकारी ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कर रहे हैं। ओपीडी में कोई भी अव्यवस्था होने पर तुरंत सीएमएस का फोन घनघनाने लगता है।
अस्पताल में तीसरी नजर का पहरा रहने से कुछ हद तक मरीजाें की परेशानी भी कम हो गई है। चिकित्सकीय सलाह के साथ जांच व उपचार के लिए उन्हें भटकना नहीं पड़ता है। हालांकि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे काफी पहले से लगे हुए थे लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश काम नहीं करते थे। क्रियाशील करने से पहले सभी 40 कैमरों की मरम्मत कराई गई है।
अस्पताल के मुख्य द्वार, इमरजेंसी प्रवेश द्वार, पर्चा व दवा काउंटर, 12 ओपीडी कक्ष, आईपीडी वार्ड, आयुष्मान काउंटर, इंजेक्शन रूम, टीकाकरण कक्ष, जेएसवाई काउंटर, स्टोर रूम, ब्लड बैंक काउंटर, ब्लड डोनेशन कक्ष व कार्यालय सहित कुल 40 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन सभी कैमरों को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने के साथ लाइव देखने के लिए सीएमएस के कक्ष में दो स्क्रीन भी लगी है।
ओपीडी के समय सभी कैमरे ऑनलाइन न होने, ओपीडी खाली होने, सुरक्षाकर्मियों के गेट पर उपस्थित न होने व वार्ड में पंखा न चलने जैसी कमियों पर तुरंत लखनऊ से सीएमएस के मोबाइल पर फोन आ जाता है। इस पर उन्हें संबंधित कमियों को तत्काल दूर कराना पड़ता है।
अस्पताल में मंगलवार को आए राजू, दीपक, अंकिता व राजरानी ने बताया कि पहले चिकित्सक अपने कक्ष में कम रहते थे, लेकिन कैमरा लगने के बाद पूरे समय ओपीडी में रहते हैं। मुकेश, बब्लू, दिनेश, छोटका व दीपू ने बताया कि पहले बाद में आने वालों को भी दवा मिल जाती थी, लेकिन अब नंबर लगाने पर ही मिलता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. आरके वर्मा का कहना है कि अस्पताल में लगे सभी 40 सीसीटीवी कैमरों को ऑनलाइन कर दिया गया है। एक दिन कुछ कैमरे बंद होने की सूचना शासन से मिली थी, टेक्नीशियन बुलाकर उसे ठीक करा दिया गया है। अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।