बलरामपुर। सड़क हादसों में घायल होने वालों की मदद के लिए संचालित गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) योजना कागजों पर ही संचालित हो रही है। आम आदमी से जुड़ाव न हो पाने के कारण ही हादसों में घायल होने वालों को सही समय पर इलाज न मिल पाने से असमय ही जान गंवाना पड़ रही है। घायलों को सही समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने के लिए ही साल भर पहले नेक आदमी योजना का संचालन शुरू हुआ था।
आम आदमी की सुरक्षा से जुड़ी यह योजना जागरूकता अभाव में कागजी बन कर रह गई है। गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) उस व्यक्ति कहा जाता है, जो दुर्घटना में घायल व्यक्ति को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल पहुंचाता है। योजना के तहत घायल को उपचार के लिए भर्ती कराने वाले को किसी भी तरह से परेशान नहीं करने व मददगार को नाम, पता बताने के लिए बाध्य नहीं किए जाने का भी प्रावधान था। ऐसे मददगार व्यक्ति को पुलिस कभी भी गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं कर सकती है।
योजना में ऐसे मददगार व्यक्ति को योजना के तहत एकमुश्त पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है। इसके बावजूद जिले में साल भर होते रहे सड़क हादसों के बाद भी योजना के तहत चयनित एक भी मददगार नेक आदमी सामने नहीं आया।
यातायात प्रभारी अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि जिले में इस साल जनवरी से लेकर अक्तूबर तक हुए 185 सड़क हादसों में 111 लोग समय पर इलाज न मिल पाने के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। इस दौरान एक भी व्यक्ति घायलों की मदद करने के लिए आगे नहीं आया। जबकि सरकार मदद करने वालों की प्रोत्साहित भी करना चाहती है।
गुड सेमेरिटन (नेक आदमी) योजना के प्रचार प्रसार से जुड़ी जागरूकता का कार्य सिर्फ बैठकों तक ही सिमट कर रह गया। इसी कारण सरकारी अस्पतालों से लेकर शहर के अन्य सार्वजनिक स्थलों पर इस योजना से जुड़ने का संदेश देने वाली कोई भी प्रचार सामग्री कही नजर नहीं आती।
एआरटीओ अरविंद कुमार यादव का कहना है कि इस योजना के प्रचार प्रसार के लिए परिवहन विभाग, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग संयुक्त तौर पर कार्य करता है। कई बार सड़क सुरक्षा अभियान के दौरान भी इस योजना को प्रभावी बनाने पर चर्चा हो चुकी है। भरोसा दिलाया कि एक बार फिर से आम लोगों को योजना से जोड़ने के लिए सघन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।