बलरामपुर। जिला न्यायालय में रविवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसमें आपसी सुलह समझौते के आधार पर 32323 मामलों का निस्तारण किया गया। वादकारियों से अर्थदंड के रूप में 30810 रुपये की वसूली भी की गई। बाइक मरम्मत के एक मामले में चार साल मुकदमा लड़ना पड़ा। इस पर न्यायालय के आदेश पर हर्जाने के साथ बीमा कंपनी ने रकम अदा की।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज अनिल कुमार झा ने किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव एडीजे विमल प्रकाश आर्य ने बताया कि वाहन दुर्घटना प्राधिकरण अधिकारी राममिलन सिंह, एडीजे प्रथम इफ्तेखार अहमद, विशेष सत्र न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट विनोद कुमार व पॉक्सो एक्ट न्यायाधीश जहेंद्र पाल सिंह समेत उपभोक्ता फोरम, बैंक व ग्रामीण न्यायालय तथा राजस्व न्यायालयों में आपसी सुलह समझौते के आधार पर 32323 मुकदमों का निस्तारण किया गया।
चार साल बाद मिला बाइक मरम्मत का पैसा
सदर ब्लॉक के बहादुरापुर सिरसिया गांव निवासी पीयूष कुमार पांडेय की बाइक वर्ष 2019 में दुर्घटना ग्रस्त हो गई थी। बाइक की मरम्मत पर 16 हजार 665 रुपये खर्च हुए लेकिन बीमा कंपनी ने पैसा देने से इंकार कर दिया था। इस पर पीयूष ने वर्ष 2020 में न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने खर्च में 100 रुपये की कटौती करते हुए 26 हजार 565 रुपये अदा करने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। इसमें 16,565 रुपये मरम्मत खर्च के साथ पांच हजार रुपये वाद खर्च व पांच हजार रुपये गाड़ी मालिक को हुए मानसिक कष्ट का हर्जाना था। रविवार लोक अदालत में बीमा कंपनी ने पीयूष को 26 हजार 94 रुपये का चेक दिया। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि चार साल बाद न्याय मिला है।
12 साल बाद तक लगाई न्यायालय की दौड़
वर्ष 2010 में ललिया थाना क्षेत्र के बड़की इटहिया बनभुसरी गांव निवासी अशोक कुमार पाल की गांव के ही छोटू वर्मा से मामूली विवाद में मारपीट हो गई थी। 12 साल तक दोनों पक्ष मुकदमा लड़ते रहे। अंत में रविवार को दोनों ने लोक अदालत में सुलह कर ली। दोनों ने बताया कि 12 साल से न्यायालय का चक्कर लगाने में हजारों रुपये खर्च हो गए।
इलाज खर्च में मिली एक लाख की छूट
तुलसीपुर क्षेत्र के जगतापुर गांव निवासी निजामुद्दीन ने परिजनों का इलाज कराने के लिए स्थानीय बैंक से एक लाख 86 हजार 611 रुपये कर्ज लिया था। लेकिन वह अवधि के भीतर जमा नहीं कर सके। ब्याज बढ़ते-बढ़ते कर्ज ली गई रकम दो लाख पहुंच गई। इस पर निजामुद्दीन ने न्यायालय की शरण ली। रविवार को लोक अदालत में बैंक से एक लाख रुपये में समझौता हो गया। निजामुद्दीन ने बताया कि न्यायालय की शरण में आने पर एक लाख रुपये की छूट मिली है।