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बाढ़ निगल गई 50 हजार हेक्टेयर फसल

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बलरामपुर। गत महीनों में सूखे की मार से बची करीब 50 हजार हेक्टेयर धान व गन्ने की फसल पर अब बाढ़ का कहर शुरू हो गया है। जिले की तीनों तहसीलों में करीब 50 हजार हेक्टेयर धान व गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। सब्जी तथा हरे चारे की फसल भी बाढ़ के चलते तबाह हो गई है। ऐसे में पशुपालकों के समक्ष हरे चारे का संकट भी उत्पन्न हो गया है।
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इस साल पर्याप्त बारिश न होने से किसान पहले ही परेशान थे। जिन किसानों ने किसी तरह अपनी फसल बचा भी ली वो अब बाढ़ के पानी से बर्बाद हो रही है। पीड़ित किसान राम दुलारे, अशफाक, शिवकुमार, रामतेज, इलियास व अशोक ने बताया कि सूखे के बीच भारी लागत लगाकर किसी तरह फसलें बचाई थीं। बाढ़ के चलते अब सारी लागत पानी में डूब गई है। बाढ़ का पानी यदि जल्दी नहीं घटा तो पूरी पूंजी डूब जाएगी। परिवार के समक्ष भोजन का संकट भी उत्पन्न हो जाएगा। इन लोगों ने जिलाधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार से फसलों की क्षति का आंकलन कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
सदर तहसील के गंगा बख्श भागड़ गांव में राप्ती की कटान के चलते 25 परिवार बेघर हो चुके हैं। कटान के डर से लोग अपना आशियाना खुद उजाड़कर सुरक्षित स्थान पर पलायन कर रहे हैं। गांव के मोहनलाल, शेषराम, शिल्प कुमार, ननके, रूप नारायण, मनोरथ, जानकी, तिलकराम, बाबादीन, बिंद्रा, हनुमान, मोतीलाल, मंशाराम, प्रमोद कुमार, छोटकऊ, शिवकुमार, अमरनाथ, रामसागर, राकेश, मुंशीलाल, श्याम सुंदर, सीताराम, गोली, कृपाराम और जगतराम का मकान कटकर नदी में समाहित हो चुका है।
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कई अन्य लोगों के मकान भी कटान की जद में हैं। ये लोग अपना आशियाना खुद उजाड़कर सुरक्षित स्थान की तरफ पलायन कर रहे हैं। ग्रामीण नानबाबू, हरिराम, सुंदर, ननकू, छोटकऊ, भारत व विजय कुमार ने बताया कि बीते दो दिन में करीब 200 एकड़ खेती की जमीन भी कटकर नदी में समाहित हो चुकी है। मगर अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल पाई है।
ललिया थाने की पुलिस ने सीओ राधा रमण सिंह के साथ खैरपुरवा गांव में बाढ़ के बीच फंसे 14 लोगों को जुगाड़ से ड्रम की नाव बनाकर सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सरकारी नाव नहीं है। अचानक बाढ़ आने से कई लोग फंस गए थे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी को बाहर निकाला।
हरैया सतघरवा थाना क्षेत्र के सोनडीह गांव में हेंगहा पहाड़ी नाले की बाढ़ के चलते बुझावन सिंह का पक्का मकान कटकर नाले में समा गया। पीड़ित ने बताया कि अचानक घर गिरने लगा तो परिवार के सभी लोगों ने भागकर जान बचाई। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी नाले से कटान के चलते कई एकड़ खेत भी इसमें समाहित हो चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को प्रार्थनापत्र देकर कटान रोकने के लिए बांध बनवाने की मांग की थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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