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Balrampur News: सावन का पहला सोमवार, शिवालयों में जुटेंगे श्रद्धालु

Mon, 22 Jul 2024 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर। सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई को पहले सोमवार से हो रही है। इस बार शुभ संयोग बन रहा है कि सावन माह का शुभारंभ व समापन दोनों सोमवार के दिन हो रहा है। सावन के पहले सोमवार को लेकर शिवालयों में रंग-राेगन के साथ रंग-बिरंगे झालरों से सजाने का काम किया जा रहा है। वहीं बाजार में पूजन सामग्री से लेकर कांवड़ियों के लिए कपड़ों की दुकानें सज गई है।
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शहर के प्रसिद्ध झारखंडी मंदिर, राजापुर भरिया स्थित कल्पेश्वर महादेव मंदिर, झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, पचपेड़वा के शिवगढ़ धाम व उतरौला के दुखहरण नाथ मंदिर सहित अन्य शिवालयों में सावन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। सोमवार को शिवालयों के पट सुबह चार बजे ही खोले जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु दिनभर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सकेंगे। इस बार सावन में पांच सोमवार का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि सावन माह में सोमवार का व्रत रहना काफी फलदायी होता है। सावन माह की शुरुआत के साथ शहर में विभिन्न जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर लगाए जाएंगे। झारखंडी मंदिर के प्रधान पुजारी सोनू गिरि ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने बताया कि सभी शिव मंदिरों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
पूजन सामग्री के साथ श्रृंगार के सामानों की बढ़ी बिक्री
झारखंडी मंदिर में दुकान चलाने वाले दुकानदार लकी गुप्त ने बताया कि सावन के चलते पूजन-सामग्री की मांग बढ़ गई है। ग्राहक पूजन सामग्री के साथ शिवलिंग, तांबे के बने सांप, जलहरी, नर्मदेश्वर शिवलिंग, भस्म, सावन माह पत्रिका की मांग कर रहे हैं। दुकानदार राजू के अनुसार बाजार में श्रृंगार के सामान में कांच, मेटल की हरी चूड़ियां, हरे, पीले सूट व साड़ियों की डिमांड भी अधिक है।
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गौरवशाली है झारखंडी महादेव का इतिहास बलरामपुर। नगर के झारखंडी मंदिर का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है। ब्रिटिश शासन द्वारा 19वीं शताब्दी में गोंडा-गोरखपुर रेल लाइन बिछाते समय झाड़ियों के बीच खोदाई में एक शिवलिंग प्राप्त हुआ था। शिवलिंग मिलने की सूचना धीरे-धीरे शहर में फैल गई। महान शिवभक्त एवं बलरामपुर रियासत के तत्कालीन महराजा दिग्विजय सिंह ने उसी स्थान पर शिवालय का निर्माण कराया। मंदिर निर्माण के लिए महराजा के प्रयास से रेल लाइन को 50 मीटर दूर खिसकाया गया। बुजुर्गों का का कहना है कि झाड़ियों के बीच शिवलिंग मिलने के कारण ही इस मंदिर का नाम झारखंडी महादेव मंदिर रखा गया है। मान्यता है कि यहां मांगी गई सभी मन्नतें पूरी होती हैं। सावन माह के प्रत्येक सोमवार को यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
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