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Balrampur News: कलेक्ट्रेट में होगा बलरामपुर नपाप के प्रत्याशियों का नामांकन

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बलरामपुर। नगर निकाय चुुनाव को लेकर प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है। बलरामपुर नगर पालिका परिषद के प्रत्याशियों का नामांकन कलेक्ट्रेट में कराया जाएगा। उतरौला नगर पालिका परिषद के प्रत्याशी उतरौला तहसील और तुलसीपुर तहसील में तुलसीपुर, पचपेड़वा व गैसड़ी नगर पंचायत के प्रत्याशी नामांकन कर सकेंगे।
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एडीएम ज्योति गौतम ने बताया कि नामांकन स्थल का चयन करने की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। चुुनाव ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की फीडिंग का काम भी अंतिम चरण में है। बुधवार को आयोग ने विभिन्न निकायों के लिए नियुक्त किए गए रिटर्निंग ऑफिसर व सहायक रिटर्निंग ऑफिसर को चुनावी प्रक्रिया के बारे में ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया।
यह बनाए गए हैं आरओ
बलरामपुर नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद के लिए एसडीएम सदर राजेंद्र बहादुर, वार्ड संख्या एक से पांच तक के लिए सहायक श्रमायुक्त कुलदीप सिंह, वार्ड संख्या छह से 10 तक के लिए राजीव कुुमार सक्सेना, वार्ड संख्या 11 से 15 तक के लिए डीआईओएस गोविंदराम, वार्ड संख्या 16 से 20 के लिए जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रदीप कुमार, वार्ड संख्या 21 से 25 के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी एमपी सिंह को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है।
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वहीं उतरौला नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए एसडीएम उतरौला संतोष कुमार ओझा, नगर पंचायत तुलसीपुर अध्यक्ष पद के लिए एसडीएम तुलसीपुर मंगलेश दूबे, नगर पंचायत पचपेड़वा अध्यक्ष के लिए एएसडीएम ओम प्रकाश, नगर पंचायत गैसड़ी अध्यक्ष पद के लिए तहसीलदार प्रमेश कुमार को आरओ बनाया गया है।
गैसड़ी से नहीं आई एक भी आपत्ति
नगर निकायों में वार्डों के आरक्षण को लेकर सबसे अधिक 28 आपत्तियां बलरामपुर नगर पालिका परिषद से आईं हैं। जबकि तुलसीपुर में 16, उतरौला में आठ व पचपेड़वा में तीन आपत्तियां दाखिल की गईं है। वहीं नवसृजित गैसड़ी नगर पंचायत से एक भी आपत्ति नहीं आई।
दूसरी तरफ नगर निकायों के अध्यक्षों के प्रस्तावित आरक्षण की सूची जारी होने के साथ ही सक्रियता बढ़ गई है। भाजपा व सपा में सबसे ज्यादा टिकट के दावेदार हैं। दावेदारी को लेकर माहौल बनाने के लिए संभावित प्रत्याशी सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। कई ने तो अपना घोषणापत्र भी सोशल मीडिया पर जारी कर दिया है।
समन्वय बैठाने की चुनौती
जिले की पांचों नगर निकायों के अध्यक्षों की कुर्सी इस बार अनारक्षित हो गई है। जिससे भाजपा व सपा के सामने एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। एक ही पद के लिए छह से सात दावेदार आ गए हैं। कोई पार्टी का पुराना कार्यकर्ता है, तो कोई किसी माननीय का करीबी। जातीय संतुलन भी बनाकर रखना है। ऐसे में अब रणनीतिकार दावेदारों को मैनेज करने में लग गए हैं।
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