बलरामपुर। जिले में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। झारखंडी महादेव व शिवगढ़ धाम के अलावा जिले में 365 शिवालय स्थित है। इसी कारण जिले को छोटी काशी के रूप में भी पहचाना जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर शिवनाट्य कला मंडल द्वारा नगर में भव्य बारात भी निकाली जाएगी।
नगर स्थित झारखंडी मंदिर तथा पचपेड़वा स्थित शिवगढ़ धाम शिवालय का महात्म्य भी अति प्राचीन है। जिले में आज भी शिवपूजा का विशेष महत्व है। उतरौला के दु:खहरन नाथ मंदिर का शिवलिंग प्राचीन काल में मुगल शासक नेवाज अली खां को खुदाई के दौरान उत्तर दिशा की तरफ झुका मिला था। शिवलिंग को सीधा करने का बहुत प्रयास किया गया लेकिन यह सीधा नहीं हुआ। नेवाज अली खां ने इस स्थान पर विशाल मंदिर व पोखरे का निर्माण कराया। एक बार इस शिवलिंग को नष्ट करने की कोशिश भी की गई थी, तब शिवलिंग से खून की धार बह निकली थी। शिवलिंग पर आरी का निशान आज भी मौजूद है। यहां महाशिवरात्रि पर्व पर विशाल मेला लगता है। मेले में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते है।
महाशिवात्रि पर 8 मार्च को नगर में भव्य शिव बरात निकाली जाएगी। बरात के बाद शिव पार्वती के विवाह का कार्यक्रम भी होगा। संस्था के अध्यक्ष रामकुमार श्रीवास्तव तथा महामंत्री डॉ. तुलशीश दूबे ने बताया कि बरात से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। नगर स्थित रामलीला मैदान से निकलकर शिव बारात नगर भ्रमण करते हुए पुन: रामलीला मैदान पर पहुंचकर समाप्त होगी।