बलरामपुर। डायट की स्वीकृति के 17 साल बाद तक स्थाई प्राचार्य की तैनाती न हो पाने के कारण ही डायट की मान्यता फाइल निस्तारण के इंतजार में अटकी रही। एक वर्ष पूर्व वर्ष 2022 में स्थाई प्राचार्य की तैनाती के बाद ही ठंडे बस्ते में पड़ी मान्यता फाइल की सुध फिर से जिम्मेदारों को आई। इस दौरान 17 साल तक डायट का काम काज उप प्राचार्य के भरोसे ही चलता रहा।
बीते साल 2022 में प्राचार्य के पद स्थाई नियुक्ति हुई है। इसके पहले यहां के उप प्राचार्य विनय मोहन वन के पास डायट गोंडा के प्राचार्य व देवीपाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक का प्रभार रहा। जिससे यहां का कामकाज प्रभावित रहा। मान्यता के लिए अब प्राचार्य हिफज्जुर्रहमान ने प्रयास तेज किया तो मानक की खामियां उजागर हुईं।
जिला प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की मान्यता को लेकर विभाग के जिम्मेदार कभी भी गंभीर नहीं रहा। इसके चलते ही पहले जमीन विवाद का मामला लंबा खिंचा। वह समस्या दूर हुई तो अग्निशमन यंत्र लगाए जाने की अनिवार्यता ही अधिकारी भूल गए। बिना मानक पूरे किए ही बीते साल नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन को भेजे प्रस्ताव में भी खामियां दूर नहीं की गईं। डायट के प्रवक्ता पवन कुमार वर्मा कहते हैं कि अग्निशमन विभाग से समन्वय स्थापित कर मानक की कमी को दूर करा कर एनओसी लेने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।
बताया कि इसके साथ ही भूकंपरोधी भवन होने का प्रमाण पत्र भी लोक निर्माण विभाग से प्राप्त कर लिया गया है। अग्निशमन विभाग की एनओसी मिलते ही मान्यता की पत्रावली शासन के अनुमोदन को भेज दी जाएगी।
पहले बीटीसी और अब डीएलएड के छात्रों को साल 2005 से पढ़ाई में परेशानी उठानी पड़ी। बलरामपुर से 70 किमी दूर पर प्रशिक्षण के लिए जाने पर उन्हें कई तरह की दिक्कत हुई। गोंडा के डायट में सौ सीट की ही क्षमता थी, ऐसे में छात्रावास की सुविधा यहां के छात्रों को मिलने में दिक्कत रही। उन्हें किराए पर रहकर पढ़ाई करनी पड़ी भी और करनी पड़ भी रही है। अब तक 1900 छात्रों को डायट में पढ़ने का अवसर मिलता।