बलरामपुर। डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच जिले में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग अचानक बढ़ गई है। बुखार व डेंगू से बचने के लिए लोग आयुर्वेदिक दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, जिले में अब तक डेंगू के 12 मरीज मिले हैं। बुखार से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
एक ओर डेंगू मरीज जहां प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की मदद ले रहे हैं वहीं सामान्य लोग स्वस्थ रहने के लिए गिलोय व एलोवेरा जूस का सेवन कर रहे हैं। कोरोना के बाद धीमी हुई आयुर्वेदिक दवाओं की डिमांड डेंगू ने फिर बढ़ा दी है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. रामजी प्रजापति ने बताया कि आयुर्वेद में बुखार व डेंगू की प्रभावी दवाएं हैं। डेंगू की दस्तक से आयुर्वेदिक स्टोर पर पंच तुलसी गिलोय, सादा गिलोय, एलोवेरा जूस, फीफाट्रोल टेबलेट, ज्वर नाशक वटी, चिरयता, आरोग्य वटी (नीम, तुलसी व गिलोय का मिश्रण), प्लेटेंजा, श्वासारि काढ़ा, ज्वर नाशक काढ़ा, मुलेठी काढ़ा आदि दवाओं की मांग बढ़ गई है।
पतंजलि स्टोर संचालक शिरीष कुमार शुक्ल ने बताया कि डेंगू ने कोरोना काल जैसी स्थिति बना दी है। उस समय स्टोर बंद होने पर लोग घर से दवा ले जाते थे। इस समय भी आयुर्वेदिक दवा की मांग दोगुनी हो गई है। आयुर्वेदिक दवा विक्रेता नीरज शुक्ल बताते हैं कि इस समय लोग इंटरनेट पर देखकर डेंगू व बुखार से बचाव की दवाएं खरीद रहे हैं। इसमें उन्हें पांच-छह सौ रुपये में 15 दिन की खुराक मिल जाती है।
डीएम डॉ. महेंद्र कुमार ने सोमवार को जिला मेमोरियल चिकित्सालय का निरीक्षण किया था। इसके बाद अस्पताल परिसर में फीवर डेस्क खुल गई है। मंगलवार को डेस्क पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी यहां आने वाले मरीजों का नाम, पता व मोबाइल नंबर के साथ उसके शरीर का तापमान अंकित करता मिला। जबकि कुछ दिन पूर्व सीएमएस डॉ. अशोक कुमार ने अस्पताल में फीवर डेस्क न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था। वैसे मंगलवार को कोई नया मरीज नहीं मिला है।
डेंगू मरीज निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर लुट रहे हैं। इन अस्पतालों में पहले एडमीशन व जांच के लिए तीन से चार हजार रुपये लिए जाते हैं। वहीं भर्ती होने पर दवा, बेड चार्ज व डॉक्टर विजिट चार्ज को मिलाकर प्रतिदिन दो से ढाई हजार रुपये देने पड़ते हैं। प्लेटलेट्स चढ़ने पर मरीज को आठ से दस हजार रुपये अतिरिक्त बिल थमा दिया जाता है।