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पुलिस की मुठभेड़ में लूट का इनामी बदमाश घायल

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मुठभेड़ में 50 हजार का इनामी दबोचा
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बलरामपुर। पुलिस ने 50 हजार के इनामी बदमाश को शनिवार मुठभेड़ में घायल होने के बाद दबोच लिया। दोनों तरफ से हुई फायरिंग में क्राइम ब्रांच का एक सिपाही भी घायल हो गया। बदमाश का एक साथी भागने में सफल रहा। घायल बदमाश तथा सिपाही को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एसपी राजेश कुमार राय ने बताया कि उतरौला कोतवाली अंतर्गत पूर्व में महिला के साथ हुई लूट में पुलिस की विवेचना जारी है। छानबीन के दौरान घटना में शामिल बदमाशों का पता चल गया।
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शनिवार रात मुखबिर से सूचना मिली कि बदमाश देहात थाना क्षेत्र के लुचुइया गांव के पास नहर के रेगुलेटर के निकट किसी घटना को अंजाम देने की फिराक में है।

उतरौला कोतवाल संतोष सिंह तथा देहात प्रभारी निरीक्षक जेबी सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। पुलिस से घिरता देख बदमाशों ने फायरिंग शुरु कर दी। पुलिस ने भी फायर किया।

घटना में एक बदमाश पुलिस की गोली से जख्मी हो गया जबकि उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला। बदमाश की फायरिंग में क्राइम ब्रांच का सिपाही नासिर भी घायल हो गया।

दोनों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल बदमाश की पहचान धर्मेन्द्र उर्फ सूरज सिंह निवासी ग्राम खिरिया मजगवां थाना वजीरगंज के रूप में हुई है। एसपी ने राम में ही मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की। उन्होंने बताया कि फरार बदमाश की तलाश में दबिश दी जा रही है।

एक साल में पांचवीं मुठभेड़

बीते एक साल में कुख्यात बदमाशों व पुलिस के बीच पांच बार मुठभेड़ हो चुकी है। इन मुठभेड़ों में पुलिस ने आठ बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। मुठभेड़ की यह घटनाएं उतरौला कोतवाली तथा बलरामपुर देहात थाना क्षेत्र में हुई है।

मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने एक लाख व 50 हजार के इनामी बदमाशों को भी पकड़ा है। मुठभेड़ को लेकर पुलिस पर आरोप भी लगे हैं।

पुलिस का निशाना कमजोर या फिर...

बदमाशों व पुलिस के बीच अब तक हुई किसी भी मुठभेड़ में बदमाश मारा नहीं गया है। इससे लगता है कि पुलिस का निशाना कमजोर हो गया है या फिर मुठभेड़ की कहानी ही कुछ और है... क्योंकि सभी मुठभेड़ में पुलिस की गोली बदमाशों के पैर में ही लगी और घाव भी उतना ही होता है कि जिससे ज्यादा नुकसान न हो।
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इस संबंध में एसपी राजेश कुमार राय का कहना है कि पुलिस की ट्रेनिंग के दौरान यह बताया जाता है कि अपराधी को पकड़ने के लिए जरूरत पड़ने पर पहले पैर को ही निशाना बनाया जाए इसीलिए मुठभेड़ में घायल सभी बदमाशों के पैर में ही गोली लगी है।
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