बांग्लादेशी महिला को दो वर्ष की कैद
बलरामपुर। बिना वीजा व पासपोर्ट के हरैया के सहजना मणिपुर गांव में रह रही एक बांग्लादेशी महिला को फॉरनर्स एक्ट का दोषी मानते हुए सिविल जज सीनियर डिविजन ने दो वर्ष के सश्रम कारावास व एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर महिला को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
हरैया के सहजना मणिपुर गांव में अवैध रूप से रह रही बांग्लादेशी नागरिक प्रिया विश्वास के विरुद्ध एलआईयू के इंस्पेक्टर अकबाल बहादुर सिंह ने 22 अगस्त 2016 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने प्रिया को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पुलिस ने विवेचना कर प्रिया विश्वास को बांग्लादेशी नागरिक मानते हुए वीजा व पासपोर्ट के बिना भारत में प्रवेश का दोषी माना तथा फॉरनर्स एक्ट के तहत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे के दौरान छह गवाहों को सरकारी पक्ष द्वारा न्यायालय मेें पेश किया गया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि प्रिया विश्वास पश्चिम बंगाल के उत्तर चौबीस परगना के मंडलपाड़ा गांव की रहने वाली थी। नौ जुलाई 2016 को तुलसीपुर के बुद्धा मैरिज हॉल में प्रिया का विवाह ग्राम सहजना मणिपुर, थाना हरैया, बलरामपुर निवासी सुरंजन अधिकारी से हुआ था।
शादी के बाद मणिपुर सहजना के पते पर प्रिया का पैनकार्ड, आधार कार्ड व निवास प्रमाणपत्र भी सक्षम अधिकारियों द्वारा निर्गत किया गया था। प्रिया के अधिवक्ता का कहना था कि, वह बांग्लादेश नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की रहने वाली है।
जबकि सरकारी अधिवक्ता गोमती प्रसाद त्रिपाठी की दलील थी कि प्रिया विश्वास बांग्लादेश की निवासिनी है और बिना पासपोर्ट व वीजा के भारत में अवैध रूप से रह रही थी। बताया कि प्रिया का निवास प्रमाणपत्र एसडीएम तुलसीपुर ने निरस्त कर दिया है और वह फारनर्स एक्ट की पूर्णतया दोषी है।
सिविल जज सीनियर डिवीजन राहुल सिंह ने प्रिया विश्वास को फारनर्स एक्ट का दोषी मानते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास व एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।