बलरामपुर। जिले में कामार्शियल वाहनों के फिटनेस जांच के लिए कंप्यूटराइज ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। आवेदक न मिलने से ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन निर्माण की प्रक्रिया लटकी हुई है। ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन निर्माण न होने से परिवहन विभाग के अधिकारी कामार्शियल वाहनों के फिटनेस की जांच में खानापूर्ति कर रहे हैं।
सवारी वाहन बस, जीप, मार्शल, टेंपो, ट्रक व पिकअप सहित अन्य कामार्शियल वाहनों का प्रतिवर्ष एआरटीओ कार्यालय से फिटनेस कराना अनिवार्य है। एआरटीओ कार्यालय में इस समय करीब 1500 कमर्शियल वाहन पंजीकृत हैं। ऐसे में कर्मियों की मिलीभगत से खटारा वाहनों को भी आसानी से फिटनेस प्रमाण पत्र मिल जाता है। इस धांधली को खत्म करने के लिए जिले में कंप्यूटराइज ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण कराया जाना था। टेस्टिंग स्टेशन में लगे आधुनिक मशीनों से कुछ ही मिनटों में वाहनों के टायर, लाइटिंग की व्यवस्था, पहियों की गति, इंजन की आवाज, प्रेशर हार्न, ब्रेक की तीव्रता व सीट आदि की जांच आसानी से हो जाएगी। आरआई प्रदीप कुमार ने बताया कि बताया कि स्टेशन निर्माण के लिए करीब तीन एकड़ की जमीन की जरूरत है। स्टेशन का संचालन किसी प्राइवेट संस्था या व्यक्तिगत रूप से किसी व्यक्ति को करना है। ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण के लिए अभी कोई आवेदन नहीं आए हैं।