बलरामपुर। ब्लॉक स्तर पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की पौथोलॉजी में छह महीने से जांच के लिए जरूरी रसायन (रीजेंट) उपलब्ध नहीं हैं। इसके अभाव में लैब में जांच के लिए आईं सीबीसी, बायो केमेस्ट्री व ऑटो एनेलाइजर मशीन धूल फांक रहीं हैं।
लैब में किट से होने वाली जांच कर कोरम पूरा किया जा रहा है। जबकि लीवर, किडनी, यूरिक ऐसिड व कोलेस्ट्राॅल आदि टेस्ट कराने के लिए मरीजों को निजी लैब पर आठ सौ से एक हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। रसायन न होने से जांच प्रभावित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पचपेड़वा, गैसड़ी, तुलसीपुर, शिवपुरा, नंदनगर, श्रीदत्तगंज, उतरौला, सादुल्लाहनगर व गैड़ास बुजुर्ग के लैब में रसायन नहीं हैं। यहां किट से शूगर, टायफाइड, मलेरिया, सिफलिस, एचआईवी, एचसीवी यूरीन व बलगम की जांच ही हो पाती है। जबकि कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) लीवर, किडनी, यूरिक एसिड व कोलेस्ट्राॅल आदि की जांच के लिए निजी लैब जाना पड़ता है।
निजी में खर्च करनी पड़ रही रकम
सीएचसी शिवपुरा में बुधवार को इलाज कराने आए प्रदीप ने बताया कि डॉक्टर ने तीन बाहरी जांच लिखी थी। इसे कराने में एक हजार रुपये खर्च हुए हैं। राजू व सरोजा ने बताया कि सरकारी अस्पताल में लीवर, किडनी व थायराइड की जांच नहीं होती है। इसके लिए निजी में पैसा खर्च करना पड़ता है। सीएचसी पचपेड़वा में राबिया, छोटका, दीपाली, जगदीश व अफरोज ने बताया कि अधिकांश जांच बाहर से करानी पड़ती है।
कई बार भेजी डिमांड
सीएचसी अधीक्षक बताते हैं कि लैब में लगीं मशीनों को रसायन उपलब्ध कराने के लिए कई बार जिले को पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन सप्लाई न होने के कारण अभी तक नहीं मिल सकी है।
जल्द उपलब्ध कराया जाएगा रसायन
सीएचसी को लैब संबंधी रसायन उपलब्ध कराने के लिए खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होते ही सभी सीएचसी को जांच के लिए आवश्यक रसायन उपलब्ध करा दिया जाएगा।
- डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ