बलरामपुर। देश में हिंदी को सशक्त बनाने के लिए सरकारी विभागों की भाषाओं में परिवर्तन लाने की जरूरत है। हिंदी भाषा से सफलता हासिल करने के बाद इसे सशक्त बनाने के लिए सतत प्रयास कर रहे शिक्षकों ने अपने अनुभव अमर उजाला से साझा किए। सभी ने इस बात पर चिंता जताई कि लगातार जागरूकता के बाद भी न्यायालयों, पुलिस व प्रशासन के काम काज में उर्दू और फारसी के कठिन शब्दों का प्रयोग हो रहा है। उन्होंने हिंदी को सशक्त बनाने के लिए पहले सरकारी विभागों के काम-काज में हिंदी को शामिल किए जाने की आवश्यकता जताई।
महारानी लालकुंवरि महाविद्यालय के प्रोफेसर डा. प्रकाश चंद गिरी हिंदी के क्षेत्र में एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। साल 2021 में बाॅलीवुड की फिल्म मासूम सवाल में उनके लिखे आठ गीतों को स्थान मिला था। उनका कहना है कि हिंदी में सरकारी कामकाज करने के साथ ही हिंदी में ही अधिकारियों के हस्ताक्षर को भी अनिवार्य बनाया जाए।
राजकीय महाविद्यालय बहराइच की प्रोफेसर प्रिंयका श्रीवास्तव कहती हैं कि हिंदी से ही मुकाम मिला है। वह लगातार लोगों को हिंदी के लिए जागरूक कर रहीं हैं। इसी तरह एमपीपी इंटर कॉलेज के हिंदी के शिक्षक सुरेश यादव कहते हैं कि हिंदी ने समाज को नई दिशा दी है।
बलरामपुर। पुलिस महकमा हाईटेक हो रहा है, थानों में अब कंप्यूटर पर एफआईआर दर्ज होती है। यातायात पुलिस मोबाइल से वाहनों का चालान कर रही है। यूपी कॉप एप से पुलिस की पहुंच अब जन-जन तक हो गई है। इसके बावजूद पुलिस विभाग अभी भी उर्दू व फारसी के कठिन शब्दों को प्रयोग करना नहीं छोड़ पा रहा है। आज भी पुलिस द्वारा जनरल डायरी से केस डायरी तक लिखने में उर्दू और फारसी के कठिन शब्दों का ही प्रयोग किया जाता है। इसी कारण इन शब्दों का मतलब समझने के लिए आम आदमी को अधिवक्ताओं का सहारा लेना पड़ता है। पुलिस महकमे में भाषा को लेकर व्याप्त इस परेशानी को दूर कराने की पहल अभी तक शुरू नहीं हुई है।