बलरामपुर। ई-रिक्शा चालकों की मनमानी से आजिज निजी बस संचालकों ने परमिट सरेंडर करने की चेतावनी दी है। बसों का परमिट सरेंडर होने से परिवहन विभाग को हर माह करीब सात लाख रुपये का नुकसान होगा। यही नहीं, ई-रिक्शे वालों की मनमानी से नाराज छोटे सवारी वाहनों के संचालकों ने भी परमिट सरेंडर करने की चेतावनी दी है। 29 जुलाई तक कार्रवाई न होने पर निजी बस संचालकों व वाहन स्वामियों ने वाहनों का संचालन ठप करने के संबंध में एआरटीओ को पत्र दिया है।
जिले में 93 निजी बसों का संचालन हो रहा है। जिला मुख्यालय से इटवा, बढ़नी, कोयलाबास, कौवापुर, हरैया, महराजगंज तराई, ललिया, सिरसिया आदि रूटों पर निजी बसों का संचालन होने से यहां के लोगों को सफर में आसानी होती है। इन रूटों पर रोडवेज की कम बसों के संचालन से लोग निजी बसों पर ही निर्भर हैं। इसी तरह गोंडा, उतरौला व बहराइच मार्ग पर करीब 50 टैक्सियां चलाई जा रही हैं, जिनसे रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।
प्राइवेट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अब्दुल जब्बार खां व छोटे वाहन स्वामी शफीक, राजू, राजेश, फरीद, सोनू, मोनू सिंह, कल्लू आदि ने एआरटीओ को दिए गए पत्र में कहा कि प्रत्येक रूट पर ई-रिक्शा का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। ई-रिक्शा स्वामियों से न तो टैक्स लिया जाता है और न ही उनके वाहनों की फिटनेस होती है। जिले में छह हजार से अधिक ई-रिक्शा चालक लंबी-लंबी दूरियों की सवारियां ढो रहे हैं। इससे छोटे व बड़े परमिट वाले वाहनों को नुकसान हो रहा है, जबकि हर माह 93 निजी बस संचालकों से करीब सात लाख रुपये टैक्स लिया जाता है। इसी तरह से छोटे वाहन स्वामी भी हर माह करीब चार हजार रुपये टैक्स चुकाते हैं।
बसों व छोटे वाहनों का फिटनेस शुल्क भी देना पड़ता है। इन लोगों ने चेतावनी दी कि यदि 29 जुलाई तक ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो नुकसान के चलते बसों व छोटे वाहनों का संचालन ठप कर दिया जाएगा। एआरटीओ अरविंद यादव ने बताया कि निजी बसों व छोटे वाहन स्वामियों की तरफ से ई-रिक्शा चालकों की शिकायत की गई है। मामले में अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।