गोंडा। परिषदीय स्कूलों में चार लाख बच्चों को भोजन कराने वाली रसोइयां दाने-दाने को मोहताज हैं। उन्हें चार माह से मानदेय नहीं मिल रहा है। ऐसा तब है, जब दो साल पहले महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने हर माह की पहली तारीख को वेतन देने का आदेश दिया था। स्कूलों में कन्वर्जन कास्ट भी समय से नहीं पहुंच रही है। बुधवार को कन्वर्जन कास्ट की एक किश्त जारी करने की स्वीकृति डीएम ने दी है।
इस बार स्कूलों की रसोइयों को दो हजार रुपये प्रति माह मानदेय मिलना है। जिले की 7680 रसोइयों को दो हजार की दर से हर महीने एक करोड़ 54 लाख रुपये मानदेय पर खर्च होना है। माह अप्रैल से ही रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। जिससे रसोइयों के परिवार में आर्थिक संकट आ गया है। एक रसोइयां का कहना है कि उसके बेटे की तबीयत खराब है, लेकिन पैसा न होने से सही ढंग से इलाज नहीं करा पा रही है। वहीं बारिश से एक रसोइया का कच्चा घर प्रभावित हो गया है, वह मरम्मत नहीं करा पा रही है। कई रसोइयों के सामने समस्या है और विभाग चुप्पी साधे है। बता दें कि महानिदेशक ने रसोइयों को माह की पहली तारीख को मानदेय देने के आदेश चार मार्च 2020 को जारी किया था। जिसका पालन आज तक नहीं हो सका है। यह चौंकाने वाला है कि समय से वह मानदेय नहीं दिला सके। रसोइयों की उम्मीद भी टूट रही है, जब महानिदेशक के आदेश पर सुधार नहीं हुआ तो और क्या कर सकता है। (संवाद)
रसोइयों का मानदेय बढ़ोत्तरी हुई थी, जिसके हिसाब से बजट नहीं आया था। अब दो हजार के हिसाब से मानदेय जारी होना है। इसके लिए एक माह का बजट मिला है। जल्द ही एक माह का मानदेय दिया जाएगा। गणेश गुप्ता, जिला समन्वयक एमडीएम