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भारी बारिश से हर तरफ पानी-पानी, तबाह हुई खेती किसानी

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फोटो-16-बलरामपुर के हरिहरगंज-ललिया मार्ग पर बह रहा बाढ़ का पानी।-संवाद - फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। 48 घंटे से लगातार बारिश ने चारो तरफ पानी-पानी कर दिया है। बारिश व तेज हवाओं ने धान व गन्ने की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। सब्जी व तिलहनी फसलों की बोआई प्रभावित हुई है। दो दिनों में 71.2 मिमी वर्षा हुई है। गत वर्ष अक्तूबर माह में कुल हुई 67.5 मिमी वर्षा का रिकार्ड तोड़ दिया है। जिले के साथ-साथ नेपाल में हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी नालों तथा राप्ती नदी में उफान आ गया है। कई गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांवों में बने स्कूल जलमग्न हो गए हैं।
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मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश का दौर गुरुवार शाम तक जारी रहा। 48 घंटों में 71.2 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। अक्तूबर माह में हुई भारी बारिश के चलते चारो तरफ पानी-पानी ही दिख रहा है। तेज हवाओं के कारण धान व गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पक कर तैयार धान की फसल गिर गई है। जानकारों के मुताबिक, पकी फसल गिरने से 25 से 30 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित होगा। इसी तरह जिले की मुख्य नकदी फसल गन्ने को भी बारिश से व्यापक नुकसान हुआ है। खरझार नाले में आए उफान के चलते रामगढ़ मैटहवा, विजयीडीह, रामस्वरूपपुरवा, शांतिनगर व तिवारीडीह आदि गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। इन गांव को जाने वाले रास्तों पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन बाधित है।
उधर हेंगहा, जमधरा, कचनी, फोहरी, गौरिया, धौबेनिया व खैर पहाड़ी नाले में आए उफान से पहरूइया डिप, सिकटिहवा मोड़ के साथ-साथ लौकहवा डिप पर बाढ़ का पानी आने से आवागमन ठप है। ललिया थाने के पास बैरियर लगाकर हरिहरगंज-ललिया रोड पर आवागमन बंद कर दिया गया है। बजरडीह, कोड़री, पंडितपुरवा, बढ़ईपुरवा, तिकोलिया व कमदी सहित करीब 40 गांव में बाढ़ के चलते धान, मक्का, गन्ना व सब्जी की खेती पानी में डूब गई है। लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरा है। गौरा चौराहा से तुलसीपुर जाने वाले मार्ग पर दतरंगवा डिप पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन ठप है। यहां आवागमन के लिए सरकारी नाव तो दी गई है लेकिन नाविक नहीं है।
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तेजी से बढ़ रहा राप्ती का जलस्तर
नेपाल के साथ-साथ जिले में हो रही भारी बारिश के चलते राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। 24 घंटे के अंदर राप्ती नदी चेतावनी बिंदु पार करते हुए खतरे के निशान 104.620 मीटर के करीब 104.520 मीटर पर पहुंच गई है। नदी खतरे के निशान से गुरुवार शाम 4 बजे मात्र 10 सेमी नीचे थे। देर शाम तक नदी के खतरे का निशान पार करने की आशंका जताई जा रही है। राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ की आशंका के चलते लोगों ने सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू कर दी है। शुक्रवार को नदी की बाढ़ से करीब 80 गांव प्रभावित हो जाएंगे।
निगरानी की जा रही
भारी बारिश व बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी उपजिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया गया है। एडवाइजरी जारी कर लोगों को बारिश व बाढ़ से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों के राजस्व कर्मी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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