बलरामपुर। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों व गर्भवतियों को पोषाहार वितरित करने में अब परेशानी नहीं होगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जिले में पांच और न्यूट्रीशियन इकाइयां खोलने की तैयारी है। साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत की इस योजना से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा। विभागीय अधिकारी मई तक इसे संचालित करने की बात कह रहे हैं।
जिले में कुुल 1882 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां पर शून्य से पांच वर्ष तक के दो लाख छह हजार 228 बच्चे पंजीकृत हैं। 57215 गर्भवती धात्री का पंजीकरण है। केंद्रों के माध्यम से पोषाहार वितरण के साथ ही अन्नप्राशन, बचपन दिवस, ममता दिवस सहित अन्य कार्यक्रम कुपोषण को समाप्त करने के लिए कराए जाते हैं।
सदर ब्लॉक के 275 केंद्रों पर पोषाहार वितरण के लिए अभी तक सिर्फ बिजलीपुर में न्यूट्रीशियन इकाई चल रही है। अब इसका विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत हरैया सतघरवा के शिवपुरा, पचपेड़वा, उतरौला, गैड़ास बुजुर्ग व तुलसीपुर में नई इकाइयां खुलनी हैं। इन्हें मई तक शुरू करने की तैयारी है। यहां पर तैयार किए जाने वाले पोषाहार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजा जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक अखिलेश कुमार मौर्य ने बताया कि एक यूनिट की स्थापना पर 90 लाख रुपये खर्च आएंगे। इसके लिए 300 स्वयं सहायता समूह तीस-तीस हजार रुपये लगा रहे हैं। इकाई संचालन के बाद मिलने वाले लाभ का 90 प्रतिशत समूहों को और दस प्रतिशत इकाई संचालन समूह को मिलेगा।
आत्मनिर्भर होंगी महिलाएं
इकाइयों के संचालन से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी। प्रत्यक्ष तौर पर 100 महिलाओं को रोजगार मिलेगा। बिजलीपुर स्थित कमला महिला न्यूट्रीशियन इकाई में दो शिफ्ट में 20 महिलाएं काम करती हैं। इन्हें 266 रुपये रोजाना मजदूरी दी जाती है। यहां पर छह माह से तीन वर्ष तक के लिए मीठी दलिया, तीन से छह साल के लिए आटा, बेसन, बर्फी व गर्भवती धात्री के लिए दलिया, मूंगदाल मिक्स के साथ ही अन्य खाद्य आहार तैयार किए जा रहे हैं।