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Balrampur News: सर्द मौसम में बीमारी बढ़ा रही परेशानी, हार्टअटैक से शिक्षामित्र की मौत

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बलरामपुर। सर्द मौसम के साथ ही बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। बृहस्पतिवार को जनकपुर में हार्टअटैक से शिक्षामित्र की मौत हो गई। वहीं, निमोनिया व ब्रेन स्ट्रोक के भी मरीज बढ़ने लगे हैं। लगातार पांचवें दिन भी लोग सर्दी से परेशान दिखे। खेती किसानी पर भी असर पड़ने लगा है। जिले का अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस रहा।
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कड़ाके की सर्दी और जानलेवा साबित होने लगी है। जरवा के प्राथमिक विद्यालय जनकपुर में तैनात शिक्षामित्र लालजी (52) की देर रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। बेटे ब्रह्मलाल प्रजापति ने बताया कि उनके पिता हाई ब्लड प्रेशर व शुगर की बीमारी से परेशान थे। लखनऊ से उनका इलाज चल रहा था। रात में एकाएक तबीयत खराब होने के कारण उनकी मौत हो गई।
जिला मेमोरियल अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रमेश पांडेय का कहना है कि इस मौसम में सांस व हृदय रोगियों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। मॉर्निंग वॉक से परहेज करें। घर में ही नियमित व्यायाम करें। खानपान का विशेष ध्यान रखें।
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बृहस्पतिवार की सुबह से ही कोहरा छाया रहा। ठंडी हवाएं चलने के कारण गलन भरी सर्दी से लोग परेशान दिखे। इसका असर यातायात पर भी पड़ा। रोडवेज ने यात्रियों की संख्या कम होने के कारण दिल्ली व कानपुर रूट की चार बसों को कैंसिल कर दिया। वहीं, गोमती नगर इंटरसिटी 11 मिनट व डेमो 35 मिनट की देरी से पहुंची।
इंतजाम न होने से बढ़ी मुश्किल
बलरामपुर व झारखंडी रेलवे स्टेशन पर अभी तक रैन बसेरा नहीं बना है। ऐसे में यात्रियों को परेशानी हो रही है। वहीं, महराजगंज तराई क्षेत्र में रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, हरिहरनगर चौराहा ,चौक मंदिर, कौवापुर बाजार में अलाव का प्रबंध न होने के कारण लोगों को समस्या हो रही है। दिनेश यादव, अब्दुल्ला, शिव सिंह, ननके ने बताया कि अलाव की व्यवस्था नहीं है।
फसलों पर दिख रहा पाले का असर
नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जय प्रकाश व केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सियाराम कनौजिया ने बृहस्पतिवार को सिशहनिया घोपलापुर, हरैय्या व जगदीशपुर गांव का भ्रमण किया। किसानों से संवाद करते हुए कहा कि कम तापमान के कारण फसलों पर पाले का असर देखा जा रहा है। इससे बचाव के लिए सबसे पहले फसलों में हल्की सिंचाई कर दें। गेहूं की फसल में सिंचाई के उपरांत यूरिया का छिड़काव करें। सरसों की फसल में एक प्रतिशत गंधक का घोल बनाकर छिड़काव करें। आलू की खड़ी फसल में मैनकॉजेब व कार्बेंन्डाजिम को तीन ग्राम प्रति लीटर में मिलाकर छिड़काव करके फसल को पाले के प्रभाव से बचा सकते हैं।
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