बलरामपुर के लखाही गांव के पास पहाड़ी नाले की जद में आया खेत।
हरैया सतघरवा (बलरामपुर)। क्षेत्र में पहाड़ी नाले की बाढ़ से होने वाली कटान के चलते सैकड़ों बीघा खेत नदी में समा चुका है। प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्ययोजना न बनाए जाने के कारण इस साल भी गिरगिटही व लखाही गांव में प्राथमिक विद्यालय सहित सैकड़ों बीघा खेत कटान की जद में है। प्रशासन के ढुलमुल रवैये से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
हरैया सतघरवा विकास खंड के गिरगिटही व लखाही गांव धोबिनिया पहाड़ी नाले के किनारे बसा है। बाढ़ आने पर दोनों गावों के सैकड़ों लोगों की खेती तबाह हो जाती है। साथ ही सौ बीघा खेत कटकर नाले में समाहित हो जाता है। अबतक करीब 500 बीघा जमीन नाले में समाहित हो चुका है। गांव व खेत को कटान से बचाने के लिए ग्रामीण लगातार प्रशासन से मांग करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। नाला गांव के किनारे स्थित प्राथमिक विद्यालय तक पहुंच चुका है। यदि कटान रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो इस साल की बरसता में कई बीघा खेत के साथ विद्यालय भी नाले में समाहित हो जाएगा।
ग्रामवासी पुजारी प्रसाद, ननके, रामअधार, निरंकार, महबूब, आंधी, राधेश्याम, रमजान, छोटकऊ, हनीफ, मुनीजर, भवानी प्रसाद, साधूशरण, केशव राम व समर बहादुर सिंह आदि का कहना है कि बारिश का मौसम आने वाला है। कटान की आशंका को लेकर एक बार फिर हम लोग सहमे हुए हैं। हर साल कई बीघा खेत नाले में चला जाता है। कटान रोकने के लिए कई बार हम लोग प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस संबंध में एडीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि नदी व नालों की कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड को प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।