बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित तुलसीपुर क्षेत्र के बघेलखंड जलाशय को अब पर्यटन स्थल के बतौर विकसित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाली 70 करोड़ की धनराशि से जलाशय का कायाकल्प होगा। इस संबंध में प्रस्तावित कार्ययोजना को मंजूरी देते हुए जलाशय पर बने बांध के पुनर्वास और सुधार कार्य के लिए केंद्र सरकार ने 70 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
जलाशय के कायाकल्प का कार्य ड्रेनेज मंडल गोंडा को सौंपा गया है। यह जानकारी डीएम अरविंद सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि बांध के सुधार कार्य से क्षेत्र के किसानों को भी खेती किसानी में सीधा लाभ मिलेगा। तराई क्षेत्र में तीन प्रमुख ऐसे जलाशय हैं, जहां बांध भी बने हैं। इसमें चितौड़गढ़ बांध के पुनर्वास और सुधार कार्य के लिए पहले ही बजट जारी हो चुका है। इसके बाद अब बघेलखंड बांध के विकास कार्य के लिए बजट स्वीकृत हुआ है।
पर्यटन स्थल बनेगा पूरा जलाशय क्षेत्र
यह जलाशय नेपाल के पहाड़ी नालों से आने वाले पानी को सुरक्षित करता है। जलाशय के आसपास देशी विदेशी पक्षियों का लगने वाले जमावड़ा भी इसे पर्यटन के स्तर से एक मनोरम स्थल बनाता है। प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत बांध की साफ-सफाई के साथ ही सिल्ट सफाई आदि का कार्य कराने के साथ ही पूरे जलाशय क्षेत्र को पर्यटन के विस्तार के बतौर विकसित किया जाएगा।
गैंसड़ी व पचपेड़वा ब्लॉक का कुछ हिस्सा, तुलसीपुर तथा हरैय्या सतघरवा विकास खंड हार्ड एरिया (असिंचित क्षेत्र) में आता है। इस कारण मोतीपुर, रामपुर, बघोशवा, खैरमान, गनेशपुर, गिरगिटही, बघेलखंड, भगवानपुर, मजगवां, चित्तौड़गढ़ व कोहरगड्डी जलाशय आसपास रहने वाली करीब दस लाख की आबादी को खेती व अन्य कार्य के लिए पानी मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। बघेलखंड जलाशय का भी इसमें अहम स्थान है। यहां से निकलने वाली नहरों के माध्यम से ही इलाके के किसानों को सिंचाई की सुविधा मुहैया होती है।