अंबेडकरनगर। इजराइल से आने वाले पौधे के जरिए जिले में केले की खेती में नई क्रांति आई है। पहले यहां भुसावल आदि से केला मंगाया जाता था लेकिन अब यहां के केले बाहर भेजे जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से अंबेडकरनगर जनपद केले की खेती का हब बनता जा रहा है। लागत से लगभग दोगुना अधिक लाभ देने व कम समय में तैयार होने वाली केले की फसल को लेकर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है। लगभग 400 हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल में तीन हजार से अधिक किसान केले की खेती कर प्रगति की तरफ बढ़ रहे हैं।
परंपरागत खेती के इतर अब किसान केले की आधुनिक खेती की तरफ अधिक ध्यान दे रहे हैं। कारण यह कि केले की फसल तैयार होने में एक तरफ जहां समय कम लगता है तो वहीं लागत से लगभग दोगुना लाभ किसानों को मिल जाता है। यही कारण है कि बीते कुछ वर्षों में अंबेडकरनगर में केले की खेती करने वाले किसानों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। लगभग पांच वर्ष पहले लगभग दो हेक्टेअर क्षेत्रफल में ही केले की खेती होती थी लेकिन अब 400 से अधिक हेक्टेअर क्षेत्रफल में लगभग तीऩ हजार किसान केले की खेती कर रहे हैं।
केले की उपज तेजी से बढने का ही नतीजा है कि जहां पूर्व में भुसावल आदि जगहों से केला बिक्री के लिए जिले में आता था तो वहीं अब पैदावार बढने से आजमगढ़, जौनपुर, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, गोरखपुर समेत कई अन्य जनपदों में केला यहां से जाने लगा है।
इजराइल से आता है पौधा
अहरिया के केला किसान तुलसीराम ने कहा कि खेती के लिए इजराइल के पौधे का प्रयोग किया जाता है। इजराइल का पौधा हवाई जहाज से भारत आता है। इसके बाद उसे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा जाता है। इसके अलावा पंजाब जलगांव से भी केले के पौधे जिले में आते हैं। 16 रुपये एक पौधा मिलता है। एक बीघा क्षेत्रफल में आठ सौ पौधे लगाए जाते हैं। 13 माह में फसल तैयार हो जाती है। 10 से 12 रुपये प्रति किग्रा. की दर से खेत उपज की बिक्री व्यापारियों में की जाती है।
मई से तैयार होते हैं खेत
अहरिया निवासी सितारे हिंद वर्मा ने कहा कि पूर्व में कुछ ही किसान केले की खेती करते थे लेकिन अब जिले में तीन हजार से अधिक किसान खेती करते हैं। केले के पौधे लगाने के लिए किसान मई माह से ही खेत तैयार करने लगते हैं। गड्ढा बनाकर देसी गोबर की खाद व कीटनाशक दवाएं पहले डाल दी जाती हैं। जुलाई माह में पौधे की रोपाई कर दी जाती है। एक बीघा में लगभग 90 हजार रुपये की लागत आती है। बेहतर उपज होने पर दो लाख रुपये से अधिक में बिक्री होती है। ऐसे में प्रति बीघा लगभग एक लाख से अधिक का लाभ होता है।
दिया जाता है अनुदान
केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए आवेदन करने वाले किसानों को समय समय पर अनुदान भी दिया जाता है। जिले में केले की खेती को लेकर रुचि बढ़ी है। किसानों को इसमें अच्छा लाभ भी मिल रहा है।
संजय रस्तोगी , जिला उद्यान अधिकारी