बलरामपुर। एफटीसी प्रथम ने 2005 में उतरौला में हुए दंगे में नगर पालिका के दो पूर्व अध्यक्षों सहित 41 लोगों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सभी पर 14-14 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायाधीश ने साक्ष्य के अभाव में 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
पुलिस अभियोजन सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर केके यादव व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) नवीन कुमार तिवारी ने बताया कि वर्ष 2005 में होली पर उतरौला में दंगा हो गया था। इसमें दोनों समुदायों के बीच मारपीट व आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। उतरौला पुलिस ने नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ गुप्ता तथा अनूप गुप्ता सहित 64 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। न्यायालय में सरकारी अधिवक्ता ने 15 गवाहों को प्रस्तुत किया। ट्रायल के दौरान पांच आरोपियों की मौत हो गई थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम जहेंद्र पाल सिंह ने सोमवार को नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ गुप्ता तथा अनूप गुप्ता समेत 41 लोगों आगजनी, मारपीट व दंगे का दोषी मानते हुए पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर 14-14 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक साल अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, साक्ष्य के अभाव में 18 आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है।
कोर्ट ने अमरनाथ गुप्ता, अनूप गुप्ता, रामजी गुप्ता, शारदा प्रसाद, नंदलाल, रक्षाराम, सहदेव, सुरेश, राजेंद्र, सुनील कुमार, कपिल कुमार, दुर्गेश, कौशल कुमार, विश्वनाथ गुप्ता, ओमप्रकाश, दिलीप, बच्चू मिस्त्री, अब्दुल तव्वाब, मुस्तफा, ध्रुव कुमार, नाजिम, सतीश गुप्ता, नसीरुद्दीन, शब्बीर अहमद, आमिर कबाड़िया, एजाज अहमद, मो. हारून, अब्दुल मजीद, जमाल अहमद, कैफ, सईद, मो. इबरार, कमालुद्दीन, जहांगीर व ताहिद अली, अतुल कुमार, अरुण कुमार, असलम, राजेश, छोटू व सुमेर चंद्र गुप्ता को सजा दी है।