बलरामपुर। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम ने फिर मेधावियों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 10050 परीक्षार्थियों ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है, जबकि जिले के महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष में महज सात हजार सीटें हैं। ऐसे में तीन हजार छात्रों के सामने उच्च शिक्षा की चुनौती होगी।।
जिले में इस साल इंटरमीडिएट में कुल 13 हजार 531 ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। इसमें से 13 हजार 43 छात्रों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 10050 छात्रों ने परीक्षा पास कर ली है। जिले में कुल 32 महाविद्यालय हैं। एमएलके महाविद्यालय के कला संकाय में 2500 सीटें हैं। जबकि विज्ञान वर्ग में 1080, वाणिज्य संकाय में 300, बीबीए व बीसीए में 120 सीटें हैं।
इसके अतिरिक्त अन्य निजी महाविद्यालयों में करीब तीन हजार सीटें हैं। ऐसे में तीन हजार छात्रों के सामने अब उच्च शिक्षा में दाखिले को लेकर चुनौती है। एमएलके महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र कुमार चौहान कहते हैं कि यह बात तो सही है कि सीटें कम हैं। देखा जाएगा कि किसी भी छात्र को परेशानी न हो। इसके लिए वैकल्पिक प्रबंध किए जाएंगे।
सरकारी कॉलेजों की साख घटी
माध्यमिक शिक्षा विभाग सरकारी कॉलेजों की शिक्षा को बेहतर बनाने का दावा कर रहा है लेकिन, परिणाम ने सारे दावों की कलई खोलकर रख दी है। परिणाम में जिले को कोई भी सरकारी इंटर कॉलेज टॉप टेन में जगह नहीं बना सका। मात्र दो सहायता प्राप्त कॉलेज ही जगह बनाने में सफल हुए हैं। अन्य पर निजी विद्यालयों ने सफलता का झंडा लहराया है। डीआइओएस गोविंद राम का कहना है कि यह बात सही है कि राजकीय कॉलेजों ने टॉप टेन में कोई जगह नहीं बनाई है। ऐसे में वहां की शैक्षिक व्यवस्था की जांच कराई जाएगी।