मप्र के इटारसी से 21दिनों से पैदल चलकर रामगढ़ पहुंचे ही बिहार जाने के लिए निकले श्रमिक।
- फोटो : BALLIA
रामगढ़। लॉकडाउन के कारण प्रवासी श्रमिकों की घरवापसी का कारवां थमने का नाम नहीं ले रहा। आंध्र प्रदेश के सिंकंदराबाद में नौकरी करने गये बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी चार मजदूर पैदल चलकर 21 वें दिन स्थानीय कसबा में पहुंचे। मुज्जफरपुर के दिहाड़ी मजदूर दहाऊ पासवान गांव-आथर थाना-मुसहरी, राजेंद्र गांव-छरियापुर थाना- कफेन, रामपूजन तथा मजहर अल्ली गांव-जगदीशपुर थाना व जिला-मुजफ्फरपुर ने बताया कि सफर के दौरान बिस्कुट, चुड़ा-गुड़ खाकर घर की तरफ बढ़ रहें है। बताया कि अब कभी वापस नहीं जायेंगे और गाँव में ही मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करेंगे। इसी क्रम में पूरे मेरठ से कटिहार के लिए पाँच दिहाड़ी मजदूर साईकिल से अपने घर को निकले, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों के अनुसार हापुड़ बस अड्डे के समीप कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी साइकिल लेकर एक बस में बैठा दिया और बोला कि ये बस सबको बिहार बॉर्डर तक छोड़ के आयेगी। कटिहार निवासी पंकज, राजीव, शिवजी, राधेश्याम और कुंजबिहारी ने बताया कि साइकिल के बदले उन्हें एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी गयी और बस वाला पचरुखिया गंगा घाट के पास कटिहार के पांच और छपरा से सात मजदूरों को यह कह कर उतार दिया कि बस अब आगे नहीं जायेगी। पचरुखिया गंगा घाट के समीप उतरने के बाद भूखे प्यासे सभी मजदूर पैदल अपने घर को रवाना हो गये।