बलिया। वर्ष 2018 में अमृत योजना के तहत जल निगम ने ठेकेदार को कार्य आवंटित कर दिया। शहर के कुल 15 हजार कनेक्शन किए जाने के लिए 40 करोड़ की लागत से अमृत योजना की शुरुआत की गई। पहले चरण में शहर के कुल 7171 घरों के कनेक्शन सीवर से करने थे लेकिन आज भी कार्य अधर में लटका है।
हालांकि गलियों में हौज जरूर बने हैं। आलम यह है कि कहीं सड़क तो कहीं गालियां खोदाई के बाद जैसे-तैसे रह गईं। मोहल्ले के लोगों के अनुसार, खोदाई के समय निकली मिट्टियों को ठेकेदार उठवा ले गए। इसके कारण, यह स्थिति बनी। शहर को गंदगी और नालियों से मुक्ति दिलाने के लिए 2005-06 में 97.22 करोड़ की लागत से सीवर निर्माण कार्य शुरू किया गया। बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से पूरे शहर में सीवेज पाइप डाला गया और जगह-जगह होल बनाकर उसे ढंका गया ताकि जब भी जरूरत पड़े, सीवर की साफ-सफाई आदि का काम किया जा सके लेकिन यह कार्य कभी लगातार नहीं किया गया।
समय-समय पर सड़कों की खोदाई कर अलग-अलग काम किया गया। इसके चलते कई मार्ग वर्षों तक बदहाल रहे। करीब चार वर्ष पहले नगर को अमृत योजना में शामिल किया गया। इसके तहत, शहर के विभिन्न मोहल्लों को सीवेज पाइप से कनेक्ट करने के लिए जल निगम की ओर से अप्रैल 2018 में कार्य शुरू कराया गया। आलम यह है कि गलियों की खोदाई कर पाइप डालने और हौज बनाने का काम करने के बाद गलियों को जैसे-तैसे की हालत में ही छोड़ दिया गया और चार वर्षों से काम बंद पड़ा है। आलम यह है कि शहर की अधिकांश गलियां पूरी तरह बेतरतीब हैं और आसपास के लोग किसी तरह चलने लायक बना कर काम चला रहे हैं। नगर के शास्त्री नगर, गड़हा, बनकटा, जगदीशपुर आदि मोहल्लों के लोग इस दंश को झेल रहे हैं।
पहले चरण में 7171 घरों के कनेक्शन होने थे
बलिया। शहर के कुल 15 हजार कनेक्शन किए जाने के लिए 40 करोड़ की लागत से अमृत योजना की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में शहर के कुल 7171 घरों के कनेक्शन सीवर से करने थे लेकिन आज भी कार्य अधर में लटका है। हालांकि गलियों में हौज जरूर बने हैं। घरों का कनेक्शन सीवर से करने के लिए हौज आदि का निर्माण निर्माण कराया गया है, जिससे गलियां अस्त-व्यस्त हैं। इसके चलते, करीब 35 हजार लोग प्रभावित हैं। इन लोगों को उबड़-खाबड़ गलियों से ही होकर आना जाना पड़ता है।
एसटीपी नहीं बनने के कारण सीवर शुरू नहीं हुआ और इसके चलते ही घरों का कनेक्शन करने से ठेकेदार को रोक दिया गया। अब अमृत योजना पार्ट टू में इस कार्य को शामिल कर लिया गया है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा। - अंकुर श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल निगम, बलिया