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बच्चों को संपत्ति दें या न दें...संस्कार अवश्य दें : साध्वी निरंजन ज्योति

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वनखंडीनाथ (श्रीनागेश्वरनाथ महादेव) मठ परिसर डूहां में पहुंची केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि संतवाणी समझ में आए या न आए पर श्रोता को प्रभावित करती ही है। सत्संग का रसपान कर लिया तो तीर्थजल पीने या न पीने से क्या। सत्कर्म करते हुए जीने की इच्छा करनी चाहिए। कई लोग अपने दु:ख से दुखी नहीं होते बल्कि वे दूसरों के सुख से परेशान होते हैं। आज भारत का नाम इसलिए रोशन हो रहा है क्योंकि हम अपने पड़ोसी का दुख देखकर दुखी होते हैं। इससे पहले साध्वी निरंजन ज्योति सीधे यज्ञ मंडप पहुंचीं। वैदिक विधान से हो रहे पूजन, अर्चन, हवन आदि से काफी प्रसन्न हुईं। सामूहिक यज्ञोपवीत वाले बटुकों को उन्होंने आशीर्वाद दिया। द्वादश ज्योतिर्लिंगों सहित श्री वनखंडीनाथ की समाधि, शिवालय एवं महाशक्ति दरबार का दर्शन कर मंच पर पहुंचीं। उनको पुष्पगुच्छ, पुष्पमाला से सम्मानित किया गया। यज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र सिंह ने स्वागत किया।
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साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि प्रभु का समझकर कार्य करेंगे तो सोना जैसा परिणाम आयेगा। अपना समझकर कार्य करेंगे तो परेशानी होगी। बच्चों को संपत्ति दें या न दें किन्तु संस्कार अवश्य दें। यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की नारी आवश्यकता पड़ने पर लक्ष्मीबाई भी बन जाती है। ज्ञान कुंज की बच्चियों ने स्वागत गान की प्रस्तुति दी। संचालन सुधा पाण्डेय ने किया। शाम को सरयू मैया की दिव्य आरती की गई।
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शंकराचार्य सुमेरुपीठाधीश्वर स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज का पूजनकर यज्ञाचार्य ने उन्हें अंगवस्त्र से सम्मानित किया।
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