बलिया। उमस भरी गर्मी के बीच शहर में मच्छरों की फौज हमले के लिए तैयार हो गई हैं। शहर में हुए जगह-जगह जलभराव और गंदगी से मच्छरों के पनपने में मदद मिल रही, जिससे मच्छर लोगों को ज्यादा सता रहे हैं और नगर में डेंगू के मरीजों में बेतहाशा वृद्धि होने लगी है।
परिणामस्वरूप नगर के 13 वार्डों में मच्छरों जनित बीमारियों और डेंगू के मरीज पाए गए है। यह स्थिति ग्रामीण अंचलाें में भी है, जहां पंचायतों की ओर से अभी छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे परेशानी बढ़ती जा रही है। हालांकि नगर पालिका परिषद के प्रभारी ईओ और एसडीएम सदर अखिलेश यादव का कहना है कि शहर में रोस्टर के मुताबिक एंटी लार्वा व मैलाथीन का छिड़काव और फागिंग कराया जा रहा है।
टीडी कॉलेज के जंतु विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. दयालानंद राय का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से हवा में खासी नमी है। लिहाजा लंबे समय तक मच्छरों के लार्वा को पनपने के लिए अनुकूल माहौल है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुनील यादव बताते हैं कि मच्छर 22 से 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पनपते हैं।
इनको ज्यादा काटते हैं मच्छर
नर मच्छर की अपेक्षा मादा मच्छर ज्यादा काटते हैं। जहां कार्बन डाईऑक्साइड गैस होती है, वहीं मच्छरों का प्रकोप होता है। पेड़ सीओ-2 गैस छोड़ हैं, इसलिए शाम को पेड़ों के आसपास मच्छरों का झुंड रहता है। शरीर के तापमान और महक से भी मच्छर समीप आते हैं। गर्भवती महिलाओं और शराबियों को मच्छर अधिक काटते हैं।
कीटनाशक में मिलावट की आशंका
नगर पालिका हर साल स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता से लाखों रुपये के कीटनाशक का छिड़काव करती है। लेकिन, जानकार बताते है कि कीटनाशक में जो केमिकल होता है, उसकी हल्की मात्रा में ही कीड़ों को मारने की क्षमता होती है।
एंटीबॉडी बनने से दवा नहीं करती असर
जिला अस्पताल के डॉक्टर पंकज झा के मुताबिक बदलते मौसम में मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से केमिकल का उन पर असर नहीं हो रहा है। परजीवी या बैक्टीरिया को मारने के लिए जो दवा दी जाती हैं, उसके बाद पनपे परजीवी में दवा सहने के लिए एंटीबॉडी बन जाती है। किसी भी मच्छररोधी क्वाइल, लिक्विड या कार्ड का उपयोग करने के पांच घंटे बाद ही मच्छर फिर डंक मारना शुरू कर देते हैं।
नीम की पत्तियों का धुआं करें
डॉ. पंकज झा के अनुसार घर के आसपास पानी जमा न होने दें। नालियों में केरोसिन या सरसों का तेल डालें। परफ्यूम कम लगाएं पूरी बांह के कपड़े पहनें, कम रोशनी करें। एंटी लार्वा का छिड़काव करना क्यूलेक्स, एनाफिलीज, एडीज मच्छरों के हमले से बचा सकता है। नीम की पत्तियों को जलाकर धुआं करने से भी मच्छर और अन्य कीट समाप्त हो जाते हैं।
अब तक मिले 82 मरीज
बलिया। जनपद में अभी तक डेंगू के 82 मरीज मिल चुके हैं। इसमें 19 मरीज अभी सक्रिय अवस्था में हैं। अन्य का इलाज हो चुका है। ये आंकड़ा सरकारी अस्पताल में कराई गई जांच का है। इसके अलावा, निजी लैबों में कराई गई जांच का कोई आंकड़ा नहीं है।