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खेतों में भरा पानी, परवल की फसल हुई चौपट

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रामगढ़ स्थित ठोकर पर डंप की जा रही मिट्टी से भरी बोरिया ताकि बाढ़ के समय किसी भी स्थिति में आसानी स - फोटो : BALLIA
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रामगढ़। गंगा का जलस्तर मंगलवार की सुबह लाल निशान के करीब पहुंचकर स्थिर हो गया। नदी के स्थिर होने के कारण गंगा के मुहाने पर बसे गांव के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन डर अभी भी बरकरार है। उधर डूब क्षेत्र में गंगा का पानी निचले हिस्से में फैलने से किसानों की फसल जलमग्न हो गई है। उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
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किसानों कहना है कि लाखों रुपए खर्च कर परवल सहित अन्य फसलों की खेती की थी लेकिन गंगा का पानी निचले हिस्से में फैलने के कारण खेतों में पानी भर गया है। किसी तरह नाव के सहारे खेतों में परवल तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन विषैले व जलीय जंतुओं के दिखने के कारण उसको भी छोड़ दिया गया। किसान नगरजीत चौधरी, संजय, कैलाश, मनोज आदि का कहना है कि उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया है। अब तो ऐसा लग रहा है कि बच्चों की रोटी पर भी लाले पड़ जाएंगे। कुछ लोग तो लगान पर खेत लेकर परवल की खेती किए थे।
केंद्रीय जल आयोग गाय घाट के अनुसार गंगा का जलस्तर मंगलवार की 12:00 बजे 56.22 मीटर दर्ज की गई साथ ही नदी स्थिर बनी हुई है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के माने तो गंगा का जलस्तर घटने की उम्मीद है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण परियोजनाओं का काम ठप हो गया है। बाढ़ विभाग चहेतों को फ्लड फाइटिंग के काम के लिए मिट्टी से भरी बोरियों को भरने का ठेका दे रहा है। उधर ठेकेदारों में भी अधिक से अधिक मिट्टी की बोरियां भरने की होड़ लगी हुई है।
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